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घूसखोर सर्विस टैक्स इंस्पेक्टर को सात साल की कैद
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 25 Sep 2016 12:37 AM IST
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कोर्ट
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सीबीआई की विशेष अदालत ने फर्म के रजिस्ट्रेशन के लिए रिश्वत लेने के आरोपी सर्विस टैक्स के इंस्पेक्टर को दोषी पाते हुए सात साल का सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार रुड़की निवासी गोविंद गोपाल कौशिक ने 30 अप्रैल 2015 को सीबीआई से रुड़की में तैनात सर्विस टैक्स इंस्पेक्टर विकास जाटव के खिलाफ फर्म के रजिस्ट्रेशन के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि मातेश्वरी लेबर कांट्रेक्टर के नाम पर उनकी फर्म है।
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इसके रजिस्ट्रेशन के लिए सर्विस टैक्स के इंस्पेक्टर 3500 रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। एक पर्ची में लिखकर रिश्वत की मांग की गई थी। इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी उनके पास थी। सीबीआई ने छह मई 2015 को आरोपी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।
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विशेष जज सीबीआई अनुज कुमार संगल की अदालत में हुई सुनवाई में अभियोजन ने दस गवाह पेश किए। बचाव पक्ष का कहना था कि सर्विस टैक्स कार्यालय में एक व्यक्ति फार्म भरने का काम करता है। यह धनराशि उसे दी जानी थी। लोक अभियोजक सतीश कुमार ने कहा कि अदालत ने सर्विस टैक्स इंस्पेक्टर को मामले में दोषी पाते हुए सात साल की सजा एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
झूठी गवाही पर नोटिस
लोक अभियोजक सतीश कुमार के मुताबिक मामले में झूठी गवाही पर सर्विस टैक्स के अधीक्षक केके आनंद, कर्मचारी गुड्डू, दो अन्य गवाहों राकेश धीमान व अनुभव धीमान को 344 सीआरपीसी की कार्रवाई का नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने कहा कि क्यों न झूठे साक्ष्य पर उन्हें दंडित किया जाए।
तेजी से हुई मामले में सुनवाई
लोक अभियोजक ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई की विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक पर हुई। छह मई 2015 को मामले में एफआईआर हुई, तीन जुलाई 2015 को चार्जशीट दाखिल हुई, 14 सितंबर 2015 को आरोप तय हुए और शनिवार को अदालत ने फैसला सुनाया।