उत्तराखंड: भ्रष्टाचार का आरोपी वरिष्ठ जेल अधीक्षक सस्पेंड, होगी FIR
- -सितारगंज ओपन जेल में अवैध खनन करवाने के आरोप में हुई कार्रवाई
- -भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं में जल्द होगी एफआईआर
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विस्तार
ऊधमसिंह नगर स्थित सितारगंज ओपन जेल में अवैध खनन करवाने का आरोपी वरिष्ठ जेल अधीक्षक संजीव कुमार शुक्ला को आखिरकार शासन ने निलंबित कर दिया है। साथ ही उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं में जल्द से जल्द एफआईआर कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सितारगंज ओपन जेल का करीब छह सौ एकड़ इलाके में तमाम क्षेत्रफल नदी से लगा हुआ है। कुछ जमीन पर नदी बहती भी है। वर्ष 2014 में यहां तैनात वरिष्ठ अधीक्षक संजीव कुमार शुक्ला के विरुद्ध अवैध खनन करवाने का आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से शिकायत की गई।
मामले की जांच हुई और शुक्ला के खिलाफ रिपोर्ट आने पर उसे सितारगंज से हटाकर देहरादून अटैच कर दिया गया। इस कार्रवाई के खिलाफ संजीव शुक्ला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद उच्चस्तरीय जांच शुरू हुई।
प्रमुख सचिव की संस्तुति पर जेल मंत्री ने किया निलंबित
इस तरह एक के बाद एक जांच-पड़ताल का सिलसिला चलता रहा, जिसके बाद आखिरकार प्रमुख सचिव गृह उमाकांत पंवार ने उसे अवैध खनन का दोषी पाते हुए निलंबित करने के अलावा एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति जेल मंत्री से की।
जेल मंत्री प्रीतम सिंह की अनुमति मिलने के बाद आखिरकार संजीव शुक्ला को बुधवार के दिन निलंबित कर दिया। साथ ही जल्द से जल्द शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
अवैध खनन का आरोप पुष्ट होने के बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक संजीव शुक्ला के निलंबन की संस्तुति की गई थी। जेल मंत्री की ओर से कार्रवाई की अनुमति मिलने के बाद उन्हें बुधवार को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई भी अतिशीघ्र करने के निर्देश दिए गए हैं।
-उमाकांत पंवार, प्रमुख सचिव (गृह)
कुछ इस तरह चला जांचों का सिलसिला
- पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को मिली शिकायत के बाद ऊधमसिंह नगर के तत्कालीन जिलाधिकारी बीके संत ने संजीव कुमार शुक्ला को खनन का दोषी मानते हुए रिपोर्ट दी, जिसके बाद शुक्ला को सितारगंज ओपन जेल से हटाकर देहरादून जिला कारागार में अटैच किया गया।
- मामला हाईकोर्ट गया जहां से उच्च स्तरीय जांच तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह ओम प्रकाश और प्रमुख सचिव खनन राकेश शर्मा की कमेटी बनाकर करवाई गई। इसमें भी शुक्ला को अवैध खनन करवाने का दोषी पाया गया। इसी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
- इसके साथ ही एक तत्कालीन सचिव गृह मंजुल जोशी और अपर सचिव खनन शैलेश बगोली की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाकर रिपोर्ट मांगी गई। कमेटी ने संजीव शुक्ला के खिलाफ सभी आवश्यक तथ्य जमा करके रिपोर्ट दी, जिसमें अवैध खनन के आरोप सही साबित हुए।
- विभागीय कार्रवाई के लिए नैनीताल के जिलाधिकारी दीपक रावत को जांच करके रिपोर्ट देने को कहा गया, जिसमें शुक्ला को यह कहते हुए अवैध खनन करवाने के आरोप से बरी कर दिया गया कि उन्होंने पूर्व में आला अफसरों को पत्र लिखकर खनन होने की सूचना दी थी।
- नैनीताल के जिलाधिकारी द्वारा दिए गए तर्क को आधारहीन मानते हुए अपर सचिव रंजीत सिन्हा की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर जांच करवाई गई, जिसमें यह स्पष्ट हो गया कि खनन संजीव शुक्ला की सहमति से हुआ और इस तरह करीब पांच करोड़ के राजस्व को चूना लगा।