{"_id":"fc30dfa2a8f6256ed25596809e4f5ab8","slug":"polygraphy-test-of-rape-accused","type":"story","status":"publish","title_hn":"धर्मनगरी में रेप : सीबीआई कराएगी पॉलीग्राफी टेस्ट","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
धर्मनगरी में रेप : सीबीआई कराएगी पॉलीग्राफी टेस्ट
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 15 Jan 2014 11:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरिद्वार में नाबालिग छात्रा का रेप के बाद मर्डर के मामले में सीबीआई (सेंट्रल ब्यूरो इनवेस्टिगेशन) राज्य की मदद करने के लिए राजी हो गई है।
पॉलीग्राफी टेस्ट की तैयारी
हरिद्वार में डीएनए टेस्ट के लिए पहले ही सैंपल भेज चुकी पुलिस ऐसे नौ लोगों का पोलीग्राफ टेस्ट करवाने जा रही है। जिन्हें घटना को लेकर संदिग्ध माना जा रहा है। यह टेस्ट सीबीआई की दिल्ली स्थिति लैब में होगा।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने बुधवार को अमर उजाला को बताया कि छात्रा हत्याकांड में चिह्नित किए गए संदिग्ध नौ लोगों का सीबीआई की दिल्ली लैब में पोलीग्राफ टेस्ट करवाया जाएगा। इसके लिए सीबीआई ने पुलिस को मदद करने की हामी भर दी है।
सीबीआई निदेशक से मिले डीजीपी
उत्तराखंड के डीजीपी बीएस सिद्धू ने इस सिलसिले में गुरुवार को दिल्ली में सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा से मुलाकात की थी। इसी के बाद यह नतीजा सामने आया।
अदालत में आवेदन दाखिल
पॉलीग्राफी टेस्ट की सारी प्रक्रिया डीआईजी रेंज के सुपरविजन में होगी और इसके लिए पहले जिला एवं सत्र न्यायालय से अनुमति ली जाएगी। इसके लिए पुलिस ने अदालत में आवेदन दाखिल कर दिया है।
विज्ञापन
क्या है पॉलीग्राफ टेस्ट
पोलीग्राफ टेस्ट में संदिग्ध से सच उगलवाने की कोशिश वैज्ञानिक पद्धति से की जाती है। बेहतर तकनीक की मशीनों से संदिग्ध के दिमाग को जोड़ा जाता है।
सवालों का खाका तैयार कर मनोचिकित्सक और क्राइम एक्सपर्ट एक-एक जवाब पूछते हैं। इस टेस्ट में संदिग्ध की ब्रेन मेपिंग पर फोकस रहता है। संदिग्ध को फटाफट जवाब देने होते हैं।
यदि वह सवाल का जवाब देने को पल भर के लिए सोचता भी है तो मशीन के जरिए उसके दिमाग के दूसरी तरफ काम करने की बात का खुलासा होता है। यहीं से उसके झूठ बोलने की बात पकड़ में आती है।
सहयोगी साक्ष्य है पोलीग्राफ टेस्ट
कानून की नजर में पोलीग्राफ टेस्ट सीधे-सीधे साक्ष्य नहीं माना जाता। जांच एजेंसियां पोलीग्राफ टेस्ट को सहयोगी साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करती हैं।
वे केस को वर्कआउट करने के लिए पोलीग्राफ टेस्ट की मदद लेती है। इसके बाद ठोस सुराग आरोपी के खिलाफ जुटाए जाते हैं।
छात्रा के शरीर से मिले 'बाल" का होगा टेस्ट
छात्रा हत्याकांड में सीबीआई की फोरेंसिक लैब की मदद डीएनए जांच के लिए भी ली जाएगी। दून पुलिस की फोरेंसिक लैब में ‘बाल’ के डीएनए जांच की व्यवस्था नहीं है।
पुलिस सूत्रों की मानें तो छात्रा के शरीर से पुरुष के बाल भी मिले हैं। ये बाल कहीं संदिग्ध लोगों में से किसी के हो सकते हैं। इसकी जांच सीबीआई की लैब में कराई जा रही है।
छात्रा की वेजाइनल स्वैप से भी स्पर्म मिलने या न मिलने की रिपोर्ट नहीं आई है। यदि स्पर्म मिलने की पुष्टि होती है तब उसका डीएनए खंगाला जाएगा। उसके डीएनए को संदिग्ध लोगों के डीएनए से क्रॉस चेक कराया जाएगा।
डीआईजी को कैंप करने के निर्देश
छात्रा हत्याकांड को लेकर डीजीपी बीएस सिद्धू गंभीर है। डीजीपी ने बताया कि डीआईजी रेंज को हरिद्वार में कैंप करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
केस को वर्कआउट करने के लिए कोशिशें जारी हैं। पूरे केस में अब तक की कार्रवाई की समीक्षा डीआईजी रोजाना करेंगे।
पुलिस के रवैये से सीएम नाराज
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी हरिद्वार पुलिस के फेलियर से काफी नाराज है। सूत्र बताते है कि हर रोज मुख्यमंत्री इस मामले का फीड बैक ले रहे हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलने से नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पुलिस के आला अफसरों के प्रति सरकार का रवैया सख्त होता जा रहा है। सूत्र बताते है कि यदि जल्द ही इस मामले का समाधान नहीं हुआ तो एसएसपी समेत कुछ बड़े अफसरों पर गाज गिर सकती है।
विज्ञापन
पॉलीग्राफी टेस्ट की तैयारी
हरिद्वार में डीएनए टेस्ट के लिए पहले ही सैंपल भेज चुकी पुलिस ऐसे नौ लोगों का पोलीग्राफ टेस्ट करवाने जा रही है। जिन्हें घटना को लेकर संदिग्ध माना जा रहा है। यह टेस्ट सीबीआई की दिल्ली स्थिति लैब में होगा।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने बुधवार को अमर उजाला को बताया कि छात्रा हत्याकांड में चिह्नित किए गए संदिग्ध नौ लोगों का सीबीआई की दिल्ली लैब में पोलीग्राफ टेस्ट करवाया जाएगा। इसके लिए सीबीआई ने पुलिस को मदद करने की हामी भर दी है।
विज्ञापन
सीबीआई निदेशक से मिले डीजीपी
उत्तराखंड के डीजीपी बीएस सिद्धू ने इस सिलसिले में गुरुवार को दिल्ली में सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा से मुलाकात की थी। इसी के बाद यह नतीजा सामने आया।
अदालत में आवेदन दाखिल
पॉलीग्राफी टेस्ट की सारी प्रक्रिया डीआईजी रेंज के सुपरविजन में होगी और इसके लिए पहले जिला एवं सत्र न्यायालय से अनुमति ली जाएगी। इसके लिए पुलिस ने अदालत में आवेदन दाखिल कर दिया है।
विज्ञापन
क्या है पॉलीग्राफ टेस्ट
पोलीग्राफ टेस्ट में संदिग्ध से सच उगलवाने की कोशिश वैज्ञानिक पद्धति से की जाती है। बेहतर तकनीक की मशीनों से संदिग्ध के दिमाग को जोड़ा जाता है।
सवालों का खाका तैयार कर मनोचिकित्सक और क्राइम एक्सपर्ट एक-एक जवाब पूछते हैं। इस टेस्ट में संदिग्ध की ब्रेन मेपिंग पर फोकस रहता है। संदिग्ध को फटाफट जवाब देने होते हैं।
यदि वह सवाल का जवाब देने को पल भर के लिए सोचता भी है तो मशीन के जरिए उसके दिमाग के दूसरी तरफ काम करने की बात का खुलासा होता है। यहीं से उसके झूठ बोलने की बात पकड़ में आती है।
सहयोगी साक्ष्य है पोलीग्राफ टेस्ट
कानून की नजर में पोलीग्राफ टेस्ट सीधे-सीधे साक्ष्य नहीं माना जाता। जांच एजेंसियां पोलीग्राफ टेस्ट को सहयोगी साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करती हैं।
वे केस को वर्कआउट करने के लिए पोलीग्राफ टेस्ट की मदद लेती है। इसके बाद ठोस सुराग आरोपी के खिलाफ जुटाए जाते हैं।
छात्रा के शरीर से मिले 'बाल" का होगा टेस्ट
छात्रा हत्याकांड में सीबीआई की फोरेंसिक लैब की मदद डीएनए जांच के लिए भी ली जाएगी। दून पुलिस की फोरेंसिक लैब में ‘बाल’ के डीएनए जांच की व्यवस्था नहीं है।
पुलिस सूत्रों की मानें तो छात्रा के शरीर से पुरुष के बाल भी मिले हैं। ये बाल कहीं संदिग्ध लोगों में से किसी के हो सकते हैं। इसकी जांच सीबीआई की लैब में कराई जा रही है।
छात्रा की वेजाइनल स्वैप से भी स्पर्म मिलने या न मिलने की रिपोर्ट नहीं आई है। यदि स्पर्म मिलने की पुष्टि होती है तब उसका डीएनए खंगाला जाएगा। उसके डीएनए को संदिग्ध लोगों के डीएनए से क्रॉस चेक कराया जाएगा।
डीआईजी को कैंप करने के निर्देश
छात्रा हत्याकांड को लेकर डीजीपी बीएस सिद्धू गंभीर है। डीजीपी ने बताया कि डीआईजी रेंज को हरिद्वार में कैंप करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
केस को वर्कआउट करने के लिए कोशिशें जारी हैं। पूरे केस में अब तक की कार्रवाई की समीक्षा डीआईजी रोजाना करेंगे।
पुलिस के रवैये से सीएम नाराज
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी हरिद्वार पुलिस के फेलियर से काफी नाराज है। सूत्र बताते है कि हर रोज मुख्यमंत्री इस मामले का फीड बैक ले रहे हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलने से नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पुलिस के आला अफसरों के प्रति सरकार का रवैया सख्त होता जा रहा है। सूत्र बताते है कि यदि जल्द ही इस मामले का समाधान नहीं हुआ तो एसएसपी समेत कुछ बड़े अफसरों पर गाज गिर सकती है।