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सिरकटी लाश ने ताजा की दून की कड़वी यादें

Thu, 14 Nov 2013 11:26 AM IST
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 14 Nov 2013 11:26 AM IST
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murder mystery in dehradun

राजधानी देहरादून के सैन्य एरिया में बुधवार को बोरे में बंद युवती की सिरकटी लाश मिलने की घटना से आठ साल पुराने सनसनीखेज गीता गुंसाई और 2008 में डीएवी की छात्रा अंशु नौटियाल की हत्या की कड़वी यादें फिर उभर आईं।

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गीता गुंसाई हत्याकांड की फाइल जहां पुलिस ने महीनों मशक्कत के बाद हत्यारों तक पहुंचे बिना ही बंद कर दी वहीं अंशु नौटियाल के परिजनों को भी न्याय नहीं मिल पाया।
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गीता गुंसाई हत्याकांड
21 अक्तूबर 2005 को श्यामपुर, प्रेमनगर निवासी गीता गुंसाई पुत्री आनंद सिंह गुंसाईं रोज की तरह घर से सिलाई सीखने निकली थी। अंतिम बार गीता को एक युवक के साथ प्रेमनगर बाजार में बाइक पर देखा गया था। 23 अक्तूबर को गांव तल्ला नांगल में नहर से बोरी में गीता गुंसाई का अधजला शव मिला।
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आक्रोशित लोगों ने हत्याकांड के खुलासे के लिए तब पुलिस मुख्यालय तक प्रदर्शन किए। अधिकारियों ने गढ़ी कैंट, वसंत विहार और राजपुर के थानाध्यक्षों के अलावा एसओजी को जांच सौंपकर हत्यारों को जल्द पकड़ने का दावा किया था। लेकिन गीता के हत्यारे पकड़ में नहीं आ पाए। थक-हारकर पुलिस ने हत्याकांड की फाइल ही बंद कर दी। सूत्र बताते हैं कि सनसनीखेज मामले मे पुलिस ने कुछ लड़कों को पकड़ा भी था लेकिन तब राजनीतिक दवाब में उन्हें छोड़ दिया गया।

अंशु नौटियाल हत्याकांड
चकराता रोड स्थित सुमननगर निवासी अंशु नौटियाल (20) का शव 25 मई 2009 को डीएम आवास के बाहर एक बोरे में मिला था। डीएवी की इस छात्रा अंशु को न्याय दिलाने के लिए तब पूरा शहर और सड़कों पर उतर आया था।


मामले में तब सत्ताधारी दल के एक नेता के बेटे का नाम सामने आया था। लेकिन पुलिस ने आनन-फानन एक युवक को पकड़ कर हत्याकांड के खुलासे का दावा कर डाला। सीबीआईसीआईडी ने भी इस मामले की जांच की लेकिन अब तक अंशु के हत्यारे पकड़ में नहीं आए हैं। पुलिस ने तब जिस युवक को गिरफ्तार किया था उसे निचली अदालत ने दोषमुक्त करार दे दिया है।

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