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पढ़ें, अदालत के बाहर क्या बोला दारोगा को मारने वाला सिपाही

Tue, 14 Jul 2015 08:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 14 Jul 2015 08:53 PM IST
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ITBP personnel didn't reply media question.

मसूरी में आईटीबीपी के दारोगा सुरेंद्र लाल की हत्या और साथी जवान अख्तर हुसैन को गोली मारने के आरोपी सिपाही चंद्रशेखर को अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं है। कोर्ट में पेशी के दौरान चुप्पी साधे रहा। सिर्फ इतना बुदबुदाया, जो करना था कर दिया। मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब देना भी आरोपी ने गवारा नहीं किया।

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चंडीगढ़ से ट्रांजिट रिमांड पर लाए गए हत्यारोपी सिपाही चंद्रशेखर को सोमवार दोपहर डेढ़ बजे कोर्ट में पेश करना था, लेकिन जाम की वजह से पुलिस टीम उसे लेकर करीब तीन बजे कोर्ट में पहुंची। आरोपी सिपाही के चेहरे पर थोड़ा कसाव तो जरूर था, लेकिन किसी तरह की घबराहट नजर नहीं आई।
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पुलिस जीप से उतरते ही मीडिया ने आरोपी सिपाही से एक साथ कई सवाल दागे। सिपाही ने यह बुदबुदा कर चुप्पी साध ली कि जो करना था कर दिया। पछतावे के सवाल पर आरोपी ने गर्दन हिला दी। इसके बाद किसी सवाल का जवाब नहीं दिया।
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पुलिस अधीक्षक नगर अजय सिंह का कहना है कि पूछताछ में आरोपी ने किसी तरह के पछतावे से इनकार किया। उसकी नजर में जो किया, वह सही था।

मारने के लिए छह घंटे किया दोनों का इंतजार

ITBP personnel didn't reply media question.

आरोपी सिपाही चंद्रशेखर ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे ही गारद कमांडर और सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र लाल और एएसआई राकेश को मारने का फैसला कर लिया था। यही वजह थी कि उस दिन ड्यूटी पर बूट के बजाए पीटी शूज पहने थे।

सादे कपड़े पहनने के बाद ऊपर से वर्दी पहन ली थी। 100 कारतूस भी साथ रखे थे। उसकी योजना दोनों को साथ मारने की थी, इसलिए वह छह घंटे तक सुरेंद्र लाल और राकेश के साथ मिलने का इंतजार करता रहा।

छह बजे के करीब उसके धैर्य ने जवाब दे दिया। टीवी देखते हुए दारोगा सुरेंद्र लाल पर कई गोलियां दाग दी। कुछ दूरी पर राकेश दिखाई दिया था तो दूर से फायर मारा था, लेकिन उस तक नहीं पहुंचा।

अख्तर पर नहीं था टारगेट
हत्यारोपी चंद्रशेखर ने पुलिस पूछताछ में बताया कि अख्तर उसके टारगेट पर नहीं था। अख्तर दारोगा के पास ही बिस्तर पर लेटा हुआ था। इसी दौरान उसे गोली लगी है। इस बात का उसे भी दुख है कि अख्तर को बेवजह गोली लग गई।

सुरेंद्र लाल सिर्फ 12 दिन ही रहा बॉस

ITBP personnel didn't reply media question.

आरोपी सिपाही चंद्रशेखर की प्रताड़ना की बात बेमानी लगती है, क्योंकि सुरेंद्र लाल सिर्फ 12 दिन उसका गारद कमांडर रहा है। चंद्रशेखर आईटीबीपी चार्ली बी कंपनी का सिपाही है। बड़े भाई चंद्रभान की शादी में अवकाश पर जाने के समय उसकी कंपनी दिल्ली चली गई थी।

मई में वापसी के बाद वह दिल्ली के बजाए मसूरी में ही रुक गया था। विभागीय अधिकारियों ने प्रताड़ना की दलील को यह कहकर खारिज किया कि यदि कोई दिक्कत थी तो आला अधिकारियों को शिकायत की जानी चाहिए थी। 12 दिन में ऐसा क्या हुआ कि ऐसी नौबत आ गई।

किशोरी को जबरन दिए 20 हजार
खून-खराबे के चौबीस घंटे मसूरी में रहने के बाद आरोपी सिपाही बुलेरो से दून के रेलवे स्टेशन पर पहुंचा था। सीओ विकासनगर एसके  सिंह ने बताया कि सिपाही ने कूड़ा बीनने वाली एक किशोरी को 20 हजार रुपये दे दिए थे। हालांकि किशोरी ने यह रकम लेने से मना किया था, लेकिन आरोपी उसे जबरन देकर आईएसबीटी चला गया।

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