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देहरादून पुलिस ने लिखी एक और 'खून' की कहानी

Mon, 14 Apr 2014 12:01 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 14 Apr 2014 12:01 PM IST
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death of an accused in police custody

देहरादून में पुलिस कस्टडी में रजनीश उर्फ लाला की अप्रत्याशित मौत के बाद पुलिस के लिए जल्दबाजी में पूरी पटकथा तैयार करना चुनौती से कम नहीं था।

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सेफ प्वाइंट्स का ध्यान रखने के लिए पुलिस अफसरों ने घंटों माथापच्ची की। एक-एक पहलू पर पूरा मंथन किया गया। कानूनी विशेषज्ञों से राय मशविरे के बाद ही फर्द की एक-एक लाइन तैयार की गई।
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खुद पर गाज न गिरने की पूरी तसल्ली के बाद ही पुलिस ने कस्टडी में हुई मौत का सच गले से उतारा।

पुलिस पर उल्टा पड़ गया दांव

death of an accused in police custody

चेन लूट की घटना के बाद पुलिस ने गुडवर्क की चाह में जमकर भागदौड़ की। रविवार सुबह बड़े खुलासे की आस में रजनीश और निखिल को हिरासत में भी लिया गया, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया।

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रजनीश की मौत क्या हुई, पूरा पुलिस महकमा हिल गया। पुलिस के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी कोरोनेशन अस्पताल दौड़े चले आए। चेहरों पर आशंकाएं तैर रही थीं, लेकिन सबने जुबां सिल ली थी।

एसएसपी की मौजूदगी में तैयार हुई पटकथा

death of an accused in police custody

कोई अधिकारी कुछ बताने के लिए तैयार नहीं था। काफी देर तक मंथन के बाद कानूनी विशेषज्ञों की पूरी टीम के साथ एसएसपी अजय रौतेला की मौजूदगी में कार्रवाई की पूरी पटकथा तैयार हुई।

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कानूनी दांव पेंच में वर्दी न फंसे, इसका खासा ख्याल रखा गया। कील-कांटे दुरुस्त करने के बाद ही अफसर मीडिया से मुखातिब हुए। इसके बावजूद कहानी में कई ऐसे छेद रह गए हैं, जो आगे चलकर पुलिस की मुश्किल बढ़ा सकते हैं।

मौते के इर्द-गिर्द घूम रहे कई सवाल

death of an accused in police custody

सवाल नंबर एक
एसएसपी अजय रौतेला ने दावा किया कि हवालात में दोनों बंदियों के बीच झगड़ा हुआ था।

यदि ऐसा था तो उन्हें समय रहते अलग क्यों नहीं किया गया। दूसरी ओर, पुलिस हिरासत में दूसरा आरोपी निखिल इस बात को सफेद झूठ बता रहा है।

सवाल नंबर दो
कप्तान का दावा है कि दोनों आरोपी नशे में धुत थे। निखिल को आधी रात से पहले ही पकड़ लिया गया था, जबकि रजनीश को साढे तीन बजे उठाया गया था।

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वे नशे में थे तो उन्हें उसी वक्त डाक्टरी सहायता क्यों नहीं दिलाई गई। रजनीश की मौत के बाद निखिल को अस्पताल पहुंचाने के पीछे क्या खेल है।

सवाल नंबर तीन
कस्टडी में मौत की सचाई स्वीकारने के बाद पुलिस खुद को पूरी तरह पारदर्शी दिखा रही है। लेकिन पुलिस कुछ छिपा नहीं रही थी तो कोरोनेशन अस्पताल की इमरजेंसी और मोर्चरी की कई घंटे तक घेराबंदी क्यों की गई।

मीडियाकर्मियों ने शव दिखाने की मांग की तो इस पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया।

पहले रणबीर, अब रजनीश

death of an accused in police custody

यह भी अजब संयोग है। पुलिस पर दाग लगाने वाला थाना फिर डालनवाला बना है।

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तीन जुलाई 2009 को रणबीर एनकाउंटर मामला इसी थाना क्षेत्र में हुआ था। मामले में दर्ज हत्या के केस में इस थाने में तैनात रहे 18 पुलिसकर्मी अभी तिहाड़ जेल में बंद हैं। अब फिर इसी थाने में कस्टडी में मौत हो गई है।

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