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आरोपी की गैरमौजूदगी में ही कोर्ट ने सुनाई सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 02 Mar 2016 12:50 AM IST
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देहरादून में मंगलवार को अदालत ने आरोपी के मौजूद न होने पर भी सजा सुना दी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी जानबूझकर कोर्ट में उपस्थित नहीं है।
ऐसी स्थिति में उसे दंड के प्रश्न पर सुने बगैर ही उसके असहयोगी व्यवहार को ध्यान में रखते हुए सजा सुनाई जाती है। चेक बाउंस में अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए एक साल की कैद एवं दो लाख रुपये प्रतिकर की सजा सुनाई है।
फैसला सुनाए जाने के दौरान अभियुक्त के कोर्ट में उपस्थित न होने पर अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। वहीं, जमानतियों को भी नोटिस जारी किया गया है।
अधोईवाला, थाना डालनवाला निवासी दयाल सिंह नेगी ने कहा कि ग्राम कांडा जिला टिहरी गढ़वाल निवासी भरत सिंह पंवार ने उसके डेढ़ लाख रुपये देने थे।
दस मार्च 2013 को उसने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया मसूरी का डेढ़ लाख रुपये का चेक दिया। उसने कहा कि चेक बैंक में जमा करने पर भुगतान हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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चेक बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया। चेक बाउंस होने पर आरोपी को 15 दिन का नोटिस दिया गया लेकिन उसने धनराशि का भुगतान नहीं किया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय विनोद कुमार बर्मन की अदालत में हुई सुनवाई में बचाव पक्ष की ओर से आरोपों को निराधार बताया गया।
बचाव पक्ष ने कहा कि उस पर देनदारी नहीं है। चेक भी बहुत पुराना है, मामले को खारिज किया जाए। वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार रस्तोगी ने कहा कि आरोपी ने यह चेक दिया था, चेक पर उसके हस्ताक्षर हैं।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोप साबित होने पर आरोपी को सजा सुनाई।
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ऐसी स्थिति में उसे दंड के प्रश्न पर सुने बगैर ही उसके असहयोगी व्यवहार को ध्यान में रखते हुए सजा सुनाई जाती है। चेक बाउंस में अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए एक साल की कैद एवं दो लाख रुपये प्रतिकर की सजा सुनाई है।
फैसला सुनाए जाने के दौरान अभियुक्त के कोर्ट में उपस्थित न होने पर अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। वहीं, जमानतियों को भी नोटिस जारी किया गया है।
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अधोईवाला, थाना डालनवाला निवासी दयाल सिंह नेगी ने कहा कि ग्राम कांडा जिला टिहरी गढ़वाल निवासी भरत सिंह पंवार ने उसके डेढ़ लाख रुपये देने थे।
दस मार्च 2013 को उसने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया मसूरी का डेढ़ लाख रुपये का चेक दिया। उसने कहा कि चेक बैंक में जमा करने पर भुगतान हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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चेक बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया। चेक बाउंस होने पर आरोपी को 15 दिन का नोटिस दिया गया लेकिन उसने धनराशि का भुगतान नहीं किया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय विनोद कुमार बर्मन की अदालत में हुई सुनवाई में बचाव पक्ष की ओर से आरोपों को निराधार बताया गया।
बचाव पक्ष ने कहा कि उस पर देनदारी नहीं है। चेक भी बहुत पुराना है, मामले को खारिज किया जाए। वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार रस्तोगी ने कहा कि आरोपी ने यह चेक दिया था, चेक पर उसके हस्ताक्षर हैं।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोप साबित होने पर आरोपी को सजा सुनाई।