साहब सिंह सैनी को अब कोर्ट से झटका, निर्माण पर रोक
- -सिविल जज सीनियर डिविजन ने विवादित निर्माण पर लगाई रोक
- -कैंट बोर्ड को फिलहाल सीलिंग या ध्वस्तीकरण ना करने के निर्देश
- -केहरी गांव में चल रहा है यूपी के कैबिनेट मंत्री का अवैध निर्माण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी को केहरी गांव में चल रहे विवादित निर्माण पर कोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है। सिविल जज सीनियर डिविजन ने सैनी के निर्माण पर रोक लगा दी है। हालांकि सैनी को इस मामले में मामूली राहत भी मिली है। कोर्ट ने कैंट बोर्ड को फिलहाल निर्माण की सीलिंग या ध्वस्तीकरण ना करने के भी निर्देश दिए हैं।
कुछ समय पूर्व सैनी की पत्नी ने निर्माण से कैंट बोर्ड का प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले में 31 मई को सुनवाई हुई थी लेकिन आदेश जारी नहीं हो पाया।
शनिवार को जारी किए गए अंतरिम आदेश में कोर्ट ने निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया है। बिना नक्शा पास कर बनाए निर्माण पर कैंट बोर्ड ने कैंट बोर्ड एक्ट 2006 की धारा 247 के तहत नोटिस जारी किया है। निर्माण के सील या ध्वस्त किए जाने की वादिनी की आशंका को देखते हुए कोर्ट ने निर्माण को सील या ध्वस्त न करने का आदेश कैंट बोर्ड को दिया। यह रोक कोर्ट के अगले आदेश तक जारी रहेगी। मामले में अगली सुनवाई चार अगस्त को होगी।
नए आदेश से निर्माण पर प्रतिबंध हुआ स्पष्ट
इससे पहले जारी किए गए अन्य अंतरिम आदेश में कोर्ट ने वादिनी के स्वामित्व व अध्यासन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप न करने का जिक्र किया था। यह आदेश थाने में जमा कराकर यह बताया गया कि कोर्ट ने निर्माण की अनुमति दे दी है। पुलिस ने भी आदेश का बिना अध्ययन किए करीब एक माह से बंद बड़े निर्माण पर से निगरानी हटा ली।
हालांकि बोर्ड ने आदेश में निर्माण पर से रोक हटाने का जिक्र ना होने की बात कहकर अगले ही दिन स्थल से कुछ निर्माण सामग्री जब्त की थी। इसके बाद अवैध निर्माण को विधिवत नोटिस भी जारी किया। पुलिस का सहयोग न मिलने और बोर्ड अधिकारियों के ढीले रवैये के चलते रात-दिन निर्माण होता रहा।
अब नए आदेश से बोर्ड नोटिस के क्रम में निर्माण को सील या ध्वस्त नहीं कर पाएगा लेकिन निर्माण पर प्रतिबंध स्पष्ट हो जाने के बाद अपना निगरानी तंत्र मजबूत कर सकता है।