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बेच रहे थे भालू-हिरन के अंग, अब पीसेंगे 'चक्की'
अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Mon, 23 Dec 2013 10:59 PM IST
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उत्तराखंड के गोपेश्वर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार पांडेय ने कस्तुरा हिरन और भालू की पित्ती की तस्करी के मामले में सोमवार को दो आरोपियों को सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
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कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 10-10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है।
2008 का है केस
25 सितंबर 2008 को नंदप्रयाग-घाट मोटर मार्ग के तिराहे पर मुखबिर की सूचना पर पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने छापेमारी कर श्याम सिंह और आलम राम को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से कस्तुरा और भालू की पित्ती बरामद की गई थी।
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मामले की रिपोर्ट फोर्स के एसआई बीएस बिष्ट ने कोतवाली चमोली में दर्ज कराई गई। जिसके बाद पुलिस की तरफ से की गई जांच के उपरांत न्यायालय में वाद दायर किया गया।
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मामले में विचारण के उपरांत सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार पांडेय ने दोनों आरोपियों को दोषी पाकर तीन-तीन साल के सश्रम कारावास के साथ ही 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।