देहरादून में कोरोना से मौतें: ठंडी नहीं हो रही चिताओं की राख, 18 दिन में हुए 600 अंतिम संस्कार
प्रदेश में कोरोना मरीजों की मौतें नहीं थम रही हैं। एक अप्रैल के बाद मृत्यु दर का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। अब तक प्रदेश में हुईं कुल संक्रमितों की मौतों में से 51 प्रतिशत मौतें अकेले देहरादून जिले में हुई हैं।
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देहरादून में कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना संक्रमित मरीजों व सामान्य मौतों के बाद शहर के मोक्षधामों में रोजाना बड़े पैमाने पर अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। इसके चलते लंबे समय से मुक्तिधाम की राख ठंडी नहीं हो पा रही है। शहर के एक मुक्तिधाम में औसतन रोजाना 10 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार होता है।
शहर के तीन मुक्तिधामों में अप्रैल की तुलना में मई के 18 दिन में ही करीब 600 से अधिक कोरोना मरीजों व सामान्य मृतकों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। चंद्रबनी स्थित मुक्तिधाम के कर्मचारी रामचंद्र ने बताया कि अप्रैल में 163 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। 18 मई तक वह करीब 170 शवों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं।
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अप्रैल में 357 शवों का अंतिम संस्कार किया गया था। 18 मई तक मुक्तिधाम में 310 शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। रोजाना 10 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार होने से मोक्षधाम की राख रात को भी ठंडी नहीं हो रही है। लोगों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े इसके लिए टोकन व्यवस्था की गई है।
-विनोद गोयल, मंत्री शिवाजी सेवा समिति
अप्रैल में 90 शवों का अंतिम संस्कार किया गया था। 18 मई तक 130 शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। मुक्तिधाम में पर्याप्त मात्रा में लकड़ी मौजूद है। यहां रोजाना 10 शवों का अंतिम संस्कार कराया जाता है।
-आशीष गुप्ता, सचिव, कैंट श्मशान घाट सेवा समिति
बेटे ने कोविड और मां ने बीमारी से तोड़ा दम
हरिद्वार के चमरिया गांव निवासी मां-बेटे ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि दोनों एक साथ दुनिया से अलविदा होंगे। मां-बेटे की एक ही दिन मौत से गांव में मातम छा गया और दोनों की जलती चिताएं देख लोगों की आंखें नम हो गई। बेटे ने कोरोना और मां ने बीमारी के चलते दम तोड़ा। परिवार दुुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
चमरिया गांव निवासी लालढांग व्यापार मंडल के सचिव दिनेश चंद्र डोबरियाल को कोरोना संक्रमण हो गया था। 42 वर्षीय व्यापारी नेता का हरिद्वार के एक निजी अस्पताल में 17 दिन से उपचार चल रहा था। चार दिन पहले व्यापारी नेता की 80 वर्षीय मां धर्मा देवी को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत होने पर उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनके बेटे का उपचार चल रहा था। बुधवार को सुबह को धर्मा देवी का उपचार के दौरान निधन हो गया। जिससे चंडी घाट पुल के नीचे बने श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अंतिम संस्कार करने के दौरान ही परिजनों के पास दिनेशचंद्र डोबरियाल की भी मौत की सूचना आ गई। परिवार व गांव के लोग श्मशान घाट से ही अस्पताल पहुंचे। उनके शव को भी चंडी घाट श्मशान घाट लेकर पहुंचे। मां की चिता पूरी तरह जली भी नहीं थी कि बेटे की चिता को आग लगाई गई। एक ही दिन मां-बेटे की मौत से क्षेत्र शोक में डूूब गया। इससे पहले लालढांग के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य पितांबर दत्त हतेली का 17 मई को कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया था।