Coronavirus in Uttarakhand : कोरोना ने छीनी मुस्कान, मेले-महोत्सव का आयोजन न होने से 116 करोड़ का नुकसान
मेलों के बिना कुमाऊं की कल्पना अधूरी है। पुराने समय में मेले जहां एक दूसरे से मेलजोल बड़ाने और मनोरंजन का केंद्र होते थे, वहीं आज संस्कृति संवर्धन और संरक्षण के साथ आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु हैं। हर साल कुमाऊं में एक से बढ़कर एक मेले लगते हैं। लेकिन इस बार कोरोना की वजह कई मेले रद्द कर दिए गए हैं। जो सांकेतिक रूप से हो भी रहे हैं तो उनमें वो बात नहीं है। सबकुछ अधूरा-अधूरा सा लगता है।
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गिने चुने लोग दिखते हैं, बाहर से आने वाले दुकानदार नजर नहीं आ रहे हैं। मेला स्थल पर जो दुकानें हैं, वहां भी सन्नाटा पसरा है। पूर्णागिरि, देवीधुरा की बग्वाल, श्रावणी मेलों के लिए बाहर से आने वाले श्रद्धालु, पर्यटक कोई नहीं दिखा। कोरोना संक्रमण से बचने को कोविड-19 के मानक जो पालन करने हैं।
अकेले कुमाऊं की बात करें तो हर जिले में लगने वाले मेलों में लाखों, करोड़ों का कारोबार होता था लेकिन इस बार सब ठप है। मंदिर समिति के लोग भी मानते हैं दुकानें नहीं लगने से समिति की आय भी बंद हो गई है। इस आय से मंदिर में रंग रोगन से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य खर्चे पूरे होते थे, जो इस बार सब ठप है। अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़ और नैनीताल में मेले और महोत्सव न होने से करीब 116 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है।
चंपावत में 105 करोड़ का झटका
हर बार इन मेलों में धर्म के साथ अर्थ की प्रधानता रहती थी लेकिन कोरोना के चलते इस बार महोत्सवों में सूनापन है। 22 मार्च से जिले में तीन बड़े और छह छोटे मेले प्रभावित हुए हैं। तीन महीने तक चलने वाले मां पूर्णागिरि धाम के मेले समेत मां बाराही धाम देवीधुरा बगवाल, रीठासाहिब का जोड़ मेला, भिंगराड़ा का एड़ी बालकृष्ण मेला, गुमदेश का चैतोला मेला, सुंई-बिशुंग का वायुरथ महोत्सव, अखिलतारिणी मेला, रमक मेले में 35 लाख से अधिक श्रद्धालु उमड़ते हैं।
इन मेलों पर पड़े असर से 105 करोड़ रुपये का झटका लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों के मेले-महोत्सव में ही करीब 55 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। इन मेलों में दुकानों के न सजने से 75 से अधिक छोटे-बड़े दुकानदारों का प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से रोजगार प्रभावित हुआ है।
पिथौरागढ़ में करीब 60 लाख रुपये के कारोबार प्रभावित
कोरोना संक्रमण के कारण मेले सांकेतिक रूप से मनाए जा रहे हैं या फिर पूरी तरह से स्थगित कर दिए गए हैं। ऐसे में पूरे जिले में करीब 60 लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान है। पिथौरागढ़ में सातू-आठू, हिलजात्रा, हिरन के अलावा, ऋषि पंचमी पर पिथौरागढ़ के मोस्टमानू और बेड़ीनाग में भी बड़ा मेला आयोजित होता था।
इन मेलों में सैकड़ों दुकानें लगती थीं, जिनमें लाखों की बिक्री होती थी। इस बाद मेला आयोजित न होने से दुकानें नहीं लगी। मड़मानले का लछैर का मेला, कनालीछीना का घाड़ी मेला और सिंगाली का धनलेक का मेला भी इस बार कोरोना के कारण नहीं होगा। यह तीनों मेले ऐसे हैं, जिनमें स्थानीय स्तर से ही नहीं बल्कि मैदानी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में व्यापारी दुकानें लगाने आया करते थे। जिले के गंगोलीहाट, थल, डीडीहाट में भी मेलों का आयोजन होता है।
अल्मोड़ा में मेले न होने से दो करोड़ से अधिक का नुकसान
कोरोना के कारण मेले और महोत्सवों का आयोजन प्रभावित होने से अल्मोड़ा जिले में करीब 2 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। अल्मोड़ा के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में एक माह तक लगने वाले श्रावणी मेले में बाहर से भी काफी संख्या में व्यापारी पहुंचते थे। 40 से 50 लाख रुपये लाखों का कारोबार होता था। जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भगवान भट्ट ने बताया कि इस बार व्यावसायिक गतिविधि ठप रहने से कारोबारियों के साथ ही मंदिर समिति की आय भी प्रभावित हुई है।
वहीं अल्मोड़ा के प्रसिद्ध नंदादेवी मेले में हर साल मुरादाबाद, रामपुर, विलासपुर, मेरठ, हल्द्वानी से कारोबारी दुकानें लगाते थे। मुख्य संयोजक मनोज सनवाल के मुताबिक इस बार मेले में व्यावसायिक गतिविधि नहीं होने से बाहर के और स्थानीय व्यापारियों को करीब 50 लाख का नुकसान उठाना पड़ा। इसी तरह जिले के कई स्थानों में मेले और महोत्सव होते थे। कोरोना के कारण ये आयोजन या तो स्थगित हो गया या सांकेतिक रूप से मनाए गए, जिससे व्यवसाय को लाखों की चपत लगी है।
मेले न होने से स्थानीय व बाहरी दुकानदारों को हुआ भारी नुकसान
कोरोनाकाल के लॉकडाउन के चलते क्षेत्र में होने वाले मेलों से होने वाली दुकानदारों की आमदनी भी काफी प्रभावित हुई है। द्वाराहाट में पांच दिन तक होने वाले स्याल्दे बिखौती मेले में दुकान लगाने वाले बाहरी और स्थानीय दुकानदारों सहित कुल दो सौ दुकानदारों को करीब 40 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
इसी तरह पांच दिन तक चलने वाले चौखुटिया के चैत्राष्टमी मेले में दुकान लगाने वाले करीब सवा सौ दुकानदारों को औसतन 25 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इसी तरह हफ्तेभर तक चलने वाले मासी के सल्टिया सोमनाथ मेले में दुकान लगाने वाले करीब सौ दुकानदारों को करीब 15 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है।
मेलों पर कोरोना का ग्रहण, पड़ी दो करोड़ की मार
नैनीताल में साढ़े छह करोड़ का कारोबार प्रभावित
नैनीताल और भीमताल में हर साल लगने वाले प्रसिद्ध मेले इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गए, जिस कारण जहां एक ओर दोनों जगह निकायों को लाखों रुपये राजस्व का नुकसान पहुंचा है। वहीं करीब साढ़े छह करोड़ का कारोबार भी प्रभावित हुआ है।
नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव के अतिरिक्त दुर्गा पूजा महोत्सव आयोजित किया जाता है। दोनों महोत्सवों में 4 से 5 दिन के मेले लगते हैं। नगर पालिका से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नंदा देवी महोत्सव और दुर्गा पूजा महोत्सव में लगने वाले मेलों से पालिका को 60 से 70 लाख रुपये की आय होती थी लेकिन इस बार कोरोना के चलते पालिका इससे वंचित रही है।
वहीं दूसरी ओर फ्लैट्स मैदान पर लगने वाले इन दोनों मेलों में 700 से अधिक छोटी बड़ी दुकानें लगती हैं जिनमें 4 से 5 करोड़ रुपये का कारोबार होता था, जो इस बार नहीं हो सका। इसी तरह भीमताल में हरेले के अवसर पर लगने वाले मेले में 300 से अधिक दुकानें लगती थीं, जिनमें डेढ़ करोड़ से अधिक का कारोबार होता था। नैनीताल नगर पालिका के ईओ अशोक कुमार वर्मा व नगर पंचायत भीमताल के ईओ विजय बिष्ट बताते हैं कि मेलों के न लगने से निकायों की सालाना आय घटी है।