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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Coronavirus in Uttarakhand COVID-19 News today 26September: 16 positive found and No Patient Died

उत्तराखंड में कोरोना: रविवार को मिले 16 नए संक्रमित, एक भी मरीज की मौत नहीं

Sun, 26 Sep 2021 07:11 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 26 Sep 2021 07:11 PM IST
सार

Corona Cases in Uttarakhand Today: आठ जिलों अल्मोड़ा, चंपावत, हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है।

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Coronavirus in Uttarakhand COVID-19 News today 26September: 16 positive found and No Patient Died
कोरोना वायरस की जांच (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

विस्तार

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे में 16 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। वहीं, एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है। जबकि 16 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। सक्रिय मामलों की संख्या 226 पहुंच गई है। 

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, रविवार को 15571 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। आठ जिलों अल्मोड़ा, चंपावत, हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। वहीं, बागेश्वर, टिहरी और ऊधमसिंह नगर में एक-एक, चमोली में छह और देहरादून में सात संक्रमित मरीज मिले हैं। 
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प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या 343490 हो गई है। इनमें से 329774 लोग ठीक हो चुके हैं। प्रदेश में कोरोना के चलते अब तक कुल 7393 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदेश की रिकवरी दर 96.01 प्रतिशत और संक्रमण दर 0.10 प्रतिशत दर्ज की गई है। 

प्रदेश में लचर स्वास्थ्य सुविधाएं बन रहीं पलायन का कारण

राज्य के लिए नासूर बन चुके पलायन के मुद्दे पर राज्य गठन के बाद से जितनी बातें हो चुकी हैं, अगर इसका कुछ प्रतिशत भी जमीन पर काम हो गया होता तो पहाड़ खाली नहीं होते। उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग भी इस मुद्दे पर सरकार को तमाम सुझाव दे चुका है लेकिन हकीकत यह है कि जब तक पहाड़ में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं जुटाई जाएंगी, तक तक पहाड़ों से पलायन नहीं रुकेगा। 

राज्य में पलायन की स्थिति देखें तो अपने गठन से लेकर अब तक 1702 गांव पूरी तरह से खाली हो चुके हैं। सैकड़ों गांवों की संख्या ऐसी है, जिनकी आबादी को अंगुलियों पर गिना जा सकता है। खाली होते गांवों के कारण राज्य में 77 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि बंजर पड़ी है। अगर गैर सरकारी आंकड़ों की नजर से देखें तो यह एक लाख हेक्टेयर अधिक बैठता है। ऐसे में राज्य में पलायन के सवाल में ही इसका जवाब भी छिपा है, लेकिन राज्य के नीति नियंताओं को यह दिखाई नहीं देता है।

कोरोनाकाल में तमाम प्रवासी इस संकल्प के साथ अपने गांवों की ओर लौटे थे कि वह अब वापस नहीं जाएंगे लेकिन राज्य में फैली बेरोजगारी ने आखिरकार उसके कदम फिर से वापस मोड़ दिए। पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी भी इसी बात को दोहराते हैं। उनका कहना है कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी जाएं तो काफी हद तक पलायन रुक जाएगा।

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