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उत्तराखंड: मंत्री हरक सिंह की आंखों से छलक गए आंसू, बोले- पहली बार असहाय होकर लोगों को अपने सामने मरते हुए देखा 

Tue, 18 May 2021 09:54 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 18 May 2021 09:54 AM IST
सार

ऐसा नहीं है कि आयुष मंत्री हरक सिंह पहली बार रोए हैं। इससे पहले भी उनकी आंखों से आंसू निकले हैं।

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Coronavirus in Uttarakhand: Ayush Minister Harak Singh rawat Crying During Share an Incident about corona
मंत्री हरक सिंह रावत - फोटो : ANI

विस्तार

कोरोना से अपनों को खोने का जिक्र करते-करते जीवट माने जाने वाले आयुुष मंत्री हरक सिंह की आंखों से आंसू छलक आए। कुछ शायद अपनों को खोने का दर्द, कुछ असहाय होकर देखते रह जाने की कसक और कुछ खुलकर कुछ न कर पाने का दर्द ही है जो आंखों से बयां हो गया। 

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बता दें कि मंत्री हरक सिंह कर्मकार बोर्ड के विवाद के दौरान भी सार्वजनिक रूप से बात करते हुए हरक सिंह रोए थे, लेकिन सोमवार को विधानसभा में कारण अलग था। ये कारण शायद कोविड संक्रमण के इस दौर में बहुत कुछ न पाने का अहसास भी है।
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बकौल हरक सिंह मंत्री, दो डॉक्टर, एसडीएम, सीएमओ की मौजूदगी में वार्ड में शिफ्ट करते-करते उनके एक जानने वाले ने दम तोड़ दिया। एक से दिन में कुशल क्षेम पूछी, शाम को खबर आई अब वह नहीं है। दवा है, डॉक्टर हैं, आक्सीजन है लेकिन जिंदगी बच नहीं रहीं हैं।

ऑक्सीजन का इंतजाम कुछ दिन पहले हो जाना चाहिए था

संक्रमण कम होने के बावजूद मरने वालों की संख्या का बढ़ते चले जाना हरक सिंह के इस अहसास की पुष्टि भी कर रहा है। वहीं, इसी मजबूरी से कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने की जिद भी उभर कर सामने आई और यह स्वीकरोक्ति भी कि हमने समय रहते तैयारी नहीं की।ऑक्सीजन का इंतजाम आज हम कर रहे हैं, वह कुछ दिन पहले हो जाना चाहिए था। 

तबाही का मंजर कई बार देखा लेकिन ऐसा कभी महसूस नहीं किया
हरक सिंह के मुताबिक 2013 की केदारनाथ आपदा में वे 18 जून को केदारनाथ का दौरा कर आए थे। उस समय तबाही का मंजर देखकर वे विचलित हुए थे, लेकिन इतने नहीं जितने इस समय हो रहे हैं। उस समय उन्होंने जो कुछ देखा वह बीत चुका था। इस बार अच्छे खासे व्यक्ति को अपने सामने पल भर में जाते हुए देखना सहा नहीं जा रहा है।
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