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उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में 619 नए संक्रमित मिले, 16 की मौत, 2531 मरीज हुए स्वस्थ 

Sat, 05 Jun 2021 07:27 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 05 Jun 2021 07:27 PM IST
सार

प्रदेश में अब तक 6664 मरीजों की मौत हो चुकी है। जबकि 303659 मरीज संक्रमण को मात दे चुके हैं। 

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Coronavirus Covid 19 pandemic in Uttarakhand update 5 June : 619 new infected found, 16 dead
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे के भीतर 619 नए संक्रमित मिले और 16 मरीजों की मौत हुई है। जबकि 2531 मरीज स्वस्थ हुए हैं। कुल संक्रमितों की संख्या 333578 हो गई है। वहीं, सक्रिय मामले घटकर 17305 पहुंच गए हैं।

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वहीं, देहरादून जिले में 127, हरिद्वार में 98, नैनीताल में 83, पिथौरागढ़ में 20, टिहरी में 29, चमोली में 42, अल्मोड़ा में 118, पौड़ी में 23, रुद्रप्रयाग में 10, ऊधमसिंह नगर में 31, उत्तरकाशी में 22, बागेश्वर में 09, चंपावत जिले में 07 संक्रमित मिले हैं।
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प्रदेश में अब तक 6664 मरीजों की मौत हो चुकी है। जबकि 303659 मरीज संक्रमण को मात दे चुके हैं।

पूर्णा गांव में एक कोरोना संक्रमित की मौत
देवाल के पूर्णा गांव में 41 साल के एक कोरोना संक्रमित की कोविड सेंटर सिमली में मौत हो गई। कोविड के नियमों के तहत उनका अंतिम संस्कार किया गया। पूर्णा गांव के एक संक्रमित का 21 मई को पीएचसी देवाल में सैंपल लिया गया था, जिसमें वह पॉजिटिव मिला।

उसे दवाइयाें का किट देकर होम आइसोलशन में भेजा गया था। स्वास्थ्य ज्यादा खराब होने पर उसे 24 मई को कोविड सेंटर सिमली भेजा गया, जहां शुक्रवार देर शाम उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी डॉ. शहजाद अली ने बताया कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति का शुगर लेवल बढ़ने से मृत्यु हुई है।

बताया कि पूर्णा गांव में शनिवार से 18 से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू हो गया है। शनिवार को 80 लोगों को टीका लगाया गया। वहीं रविवार को ब्लॉक के मुंदोली व पीएचसी देवाल में 45 साल से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन होगा। 

प्रदेश में सात जिलों की संक्रमण दर पांच प्रतिशत से कम

प्रदेेश में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार काबू में आ गई है। सात जिलों में संक्रमण दर पांच प्रतिशत से कम होने के साथ ही बीते दो दिनों से देहरादून और हरिद्वार जिले को छोड़ कर बाकी जिलों में प्रतिदिन सौ से कम संक्रमित मामले मिल रहे हैं। 

कोविड काल में अब तक संक्रमितों का आंकड़ा 3.33 लाख पहुंच गया है। इसमें तीन लाख से ज्यादा मरीजों ने कोरोना को मात दी है। संक्रमित मामले घटने से स्थिति काबू में हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के दो जून तक के आंकड़ों के आधार पर उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, बागेश्वर, चंपावत, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले में संक्रमण दर पांच प्रतिशत से कम है।

जबकि छह जिलों में 5 से 10 प्रतिशत के बीच संक्रमण दर है। बीते दो दिन से देहरादून व हरिद्वार को छोड़ कर बाकी जिलों में प्रतिदिन 100 से कम संक्रमित मिले हैं। वहीं, संक्रमितों की तुलना में ठीक होने वालों की संख्या ज्यादा होने से रिकवरी दर में इजाफा हो रहा है। वर्तमान में प्रदेश की रिकवरी दर 90 प्रतिशत से अधिक हो गई है। 

सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि अभी कोरोना संक्रमण का खतरा कम नहीं हुआ है लेकिन संक्रमण की रोकथाम और ठीक होने वाले मरीजों की दर में सुधार हुआ है। संक्रमित मामले कम होने के साथ ही रिकवरी दर और मृत्यु दर में सुधार हो रहा है।

प्रदेश में पांच प्रतिशत से कम संक्रमण दर वाले जनपद
जिला       -      संक्रमण दर प्रतिशत में
उत्तरकाशी   -     4.62   
टिहरी     -        4.16
देहरादून    -      3.96
बागेश्वर     -      3.45
चंपावत      -     3.40
हरिद्वार     -       2.35
ऊधमसिंह नगर  - 2.28

कैंची मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर लगी रोक
कोरोना के संक्रमण को देखते हुए अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित कैंची में नीब करौरी बाबा के मंदिर के गेट शनिवार को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने मंदिर में लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर के मुख्य गेट बंद करने का फैसला लिया। शनिवार को मंदिर समिति ने मुख्य गेट पर रस्सी लगाकर गेट को बंद कर दिया गया है।

मंदिर प्रबंधक विनोद जोशी ने बताया कि कोरोना संक्रमण का खतरा हर दिन बढ़ने के साथ मंदिर में बाबा के भक्तों की संख्या भी बढ़ने लगी थी। सरकार ने आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगाई है, इसके चलते बाहरी राज्यों से भी भक्त दर्शनों के लिए लगातार पहुंच रहे थे। फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद किए गए हैं। शनिवार को मंदिर के गेट बंद होने से बाबा के भक्त मंदिर के बाहर से ही हाथ जोड़कर लौट गए। 
 

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