{"_id":"4dabbdce98c19301f3d64aa6fb38e3d0","slug":"consumer-troubled-by-the-increased-prices-of-vegetables","type":"story","status":"publish","title_hn":"कड़ाही के खर्च ने जेब से निकाला ‘धुआं’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कड़ाही के खर्च ने जेब से निकाला ‘धुआं’
देहरादून/अंकित चौधरी
Updated Wed, 24 Jul 2013 06:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सब्जी के मंहगे दाम ने आम आदमी की जेब से धुआं निकाल दिया है। सब्जी खरीदने से पहले हर कोई इनके दाम पूछते ही सकते में आ जा रहा है कि आखिर इस महंगाई में खरीदे भी तो कौन सी सब्जी।
विज्ञापन
सब्जी के बढ़े हुए दाम ने किचन का बजट गडबड़ा दिया है। दाल खाते-खाते परेशान हो चुके लोगों को मजबूरी में स्वाद बदलने के लिए मंहगे दामों पर ही सब्जी खरीदनी पड़ रही है।
विज्ञापन
थोक मंडी में नहीं महंगाई
मंडी समिति में थोक रेट में सब्जी के भाव की तुलना फुटकर बाजार से करें तो यह दो से तीन गुने कम है। लेकिन मंडी में आवक कम आने के कारण फुटकर सब्जी विक्रेता इस मौके को भुनाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं।
विज्ञापन
इसका कारण यह भी है कि इन दिनों पहाड़ से आने वाले आलू और हरी सब्जियों की आवक ठप है। केवल मैदानी क्षेत्र से ही खपत के हिसाब से कम आवक मंडी में पहुंच रही है।
नहीं हैं नियंत्रण
फुटकर में बिकने वाली सब्जी के दाम पर किसी का नियंत्रण नहीं है। फुटकर में सब्जी वाले क्षेत्र और सब्जी की मात्रा के हिसाब से दाम वसूलते हैं। इसका साफ उदाहरण आढ़त बाजार और छह नंबर पुलिया, जोगीवाला में बिकने वाली सब्जी के दाम से लग जाता है। इन दोनों जगहों पर फुटकर में सस्ती सब्जी खरीददारों को मिल जाती है।
मासाखोरी भी एक कारण
मंडी में मौजूद मासाखार भी सब्जी के दाम महंगे होने की एक कड़ी हैं। मासाखोर मंडी में आढ़तियों से सब्जी खरीदकर फुटकर ठेकी और दुकान संचालकों को बेचते हैं। इनके अपने कमीशन के कारण भी फुटकर में सब्जी के रेट बढ़ते हैं। जबकि आढ़त बाजार के विक्रेता सीधे मंडी आढ़तियों से सब्जी खरीदते हैं।
इनकी भी सुनिए
'फुटकर बाजार में सब्जी के बढ़ते दामों पर मैने पिछले हफ्ते ही फुटकर बाजार के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी। फुटकर में रेट पर नियंत्रण के लिए हर माह इनकी बैठक के प्रयास किए जा रहे हैं।'
विजय थपलियाल, सचिव मंडी समिति
सब्जियों के रेट की तुलना (रुपये प्रति किलो)
| सब्जी | मंडी में
| फुटकर में |
| आलू | 10
| 20-25 |
| प्याज | 20
| 35-40 |
| टमाटर
| 18 | 40-50 |
| हरी मिर्च | 22 | 60-80 |
| लौकी
| 12 | 35-40 |
| तोरई
| 08 | 25-30 |
| फ्राजबीन | 20
| 40-45 |
| अरवी | 15
| 35-40 |
| खीरा | 15 | 40-45 |
| करेला | 12
| 35-40 |
| भिंडी | 12
| 40-50 |