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विलुप्त गिद्धों को मिलेगा सुरक्षित ‘आसमान’

Tue, 19 Jan 2016 01:27 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Jan 2016 01:27 PM IST
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conservation of extinction vultures.

देश के कई प्रांतों में विलुप्त हो गए प्रकृति के सफाईकर्मी गिद्धों को उड़ान भरने के लिए अब सुरक्षित ‘आसमान’ मिलेगा।

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गिद्धों के लिए सौ किमी के दायरे में आने वाले उत्तराखंड, हरियाणा और यूपी के क्षेत्रों को सुरक्षित किया जा रहा है। हरियाणा पिंजौर के नेचरल हिस्ट्री सोसाइटी के वल्चर ब्रीडिंग सेंटर से प्रौढ़ हो चुके गिद्धों को पहली बार छोड़ा जाएगा।

गिद्धों को मरे जानवर खाने से कोई नुकसान न हो, इसके लिए प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) दिग्विजय सिंह खाती ने ड्रग कंट्रोलर को पत्र लिखकर पशुओं के इलाज में डायक्लोनोफिक दवा पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए कहा है।
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पिंजौर के ब्रीडिंग सेंटर से गिद्धों को छोड़ने के पहले यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गिद्ध ऐसे पशुओं के शव न खाने पाएं, जिन्होंने कभी डायक्लोफिनिक दवा खाई हो। अगर गिद्धों ने डायक्लोफिनिक वाला मांस खा लिया तो उनके गुर्दे फेल हो जाएंगे और मौत हो जाएगी।
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इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग ने जन-जागरूकता अभियान छेड़ दिया है। साथ ही ड्रग कंट्रोलर को पत्र लिखकर प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) खाती ने कहा है कि मनुष्यों को दर्दनाशक डायक्लोफिनिक दवा की न्यूनतम डोज दी जाए और पशुओं के इलाज में इसे प्रतिबंधित कर दिया जाए।

केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भी इस संबंध में कई बार आदेश जारी कर चुका है। खाती ने बताया कि पिंजौर में गिद्धों को रखकर ब्रीडिंग कराई जा रही है। जो गिद्ध बड़े हो गए हैं, उन्हें छोड़ा जा रहा है। एक गिद्ध सौ किलोमीटर के दायरे में उड़ान भरता है। यह दायरा सुरक्षित किया जा रहा है।

भारतीय वन्य जीव संस्थान के पूर्व विज्ञानी डा. बीसी चौधरी इस अभियान के कोआर्डिनेटर हैं। पिंजौर से छोड़े जाना वाला गिद्ध हरियाणा, यूपी के इलाके समेत दून वैली को कवर कर लेगा। अगर जरूरत हुई तो एक गिद्ध दूसरे क्षेत्र में भी छोड़ा जा सकता है।


इसलिए जरूरी है गिद्ध
गिद्ध इको सिस्टम का सफाईकर्मी कहा जाता है। मरे हुए जानवरों के सड़ने से बीमारियां, प्रदूषण फैले इसके पहले यह शव चट कर जाता है। इससे दूसरे पशु, मानव संक्रमित नहीं हो पाते हैं और माहौल में दुर्गंध नहीं फैलती। सड़ा मांस खाने पर गिद्ध पर किसी वायरस, बैक्टीरिया का दुष्प्रभाव नहीं होता है, लेकिन दर्दनाशक दवा डायक्लोफिनिक यह हजम नहीं कर पाता और इसके गुर्दे फेल हो जाते हैं।

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