हर अधिकारी लेगा एक स्कूल गोद: दिव्यांग और अक्षम शिक्षकों के वीआरएस के लिए गठित होगी कमेटी, पढ़ें ये खास बातें
शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि शिक्षक आचरण नियमावली का पालन करें। कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए सबसे पहले अनुशासित होना जरूरी है। मंत्री ने कहा कि स्कूलों में कम से कम 220 दिन अनिवार्य कक्षाएं चलनी चाहिए। उन्होंने राज्य की साक्षरता दर को शत-प्रतिशत करने के लिए हर शिक्षक को दो-दो लोगों को साक्षर बनाने के लिए कहा।
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शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने शिक्षा विभाग में दिव्यांग और अक्षम शिक्षकों को वीआरएस देने के लिए अधिकारियों को एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि विभाग का हर अधिकारी अपने क्षेत्र के एक स्कूल को गोद लेेगा।
शिक्षा मंत्री ने यह बात यहां राजावाला में विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर के समापन के दौरान कही। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षक आचरण नियमावली का पालन करें। जो पहले विभाग के सामने उचित फोरम में अपनी बात रखें। यदि इसके बाद भी समस्या का निपटारा नहीं होता तो शिक्षक शासन स्तर पर अपनी बात रख सकते हैं। कोर्ट किसी समस्या का अंतिम विकल्प हो सकता है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए सबसे पहले अनुशासित होना जरूरी है। विभाग में अनुशासन बनाने के लिए विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा एवं आचरण नियमावली का पालन करना होगा। कई कार्मिक अपनी बात को उचित फोरम में रखे बिना सीधे कोर्ट पहुंच जाते हैं। जिससे विभागीय कार्यों में दिक्कत पैदा होती है।
स्कूलों में कम से कम 220 दिन अनिवार्य कक्षाएं
मंत्री ने कहा कि स्कूलों में कम से कम 220 दिन अनिवार्य कक्षाएं चलनी चाहिए। उन्होंने राज्य की साक्षरता दर को शत-प्रतिशत करने के लिए हर शिक्षक को दो-दो लोगों को साक्षर बनाने के लिए कहा। मंत्री ने कहा कि राज्य में अब भी सात प्रतिशत लोग निरक्षर हैं। कार्यक्रम में विभागीय सचिव रविनाथ रमन ने कहा कि शिक्षा विभाग में पहली बार चिंतन शिविर का आयोजन किया गया, विभाग को इसका फायदा मिलेेगा। राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि हर स्कूल में आरटीई की जानकारी एवं छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। शिविर में बतौर विशिष्ट अतिथि पूर्व राज्यसभा सांसद एवं इंडियन पब्लिक स्कूल के चेयरमैन आरके सिन्हा ने कहा कि इस तरह का शिविर राज्य की शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार के लिए मील का पत्थर साबित होगा। शिविर में मुख्य शिक्षा अधिकारियों ने अपने जिलों में किए गए नवाचारी कार्यों की जानकारी दी।
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