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टिहरी भर्ती घोटाले में तत्कालीन सीएमओ दोषी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 05 Nov 2015 03:12 PM IST
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टिहरी में वर्ष 2011 से 2014 के बीच हुए आउटसोर्सिंग भर्ती घोटाले में तत्कालीन सीएमओ को दोषी पाया गया है।
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इस दौरान 50 चतुर्थ श्रेणी कर्मियों और दो वाहन चालकों की नियुक्ति की गई थी। जांच टीम ने स्पष्ट किया है कि तत्कालीन सीएमओ और कार्यालय सहायक ने नियुक्ति से पहले शासन और महानिदेशालय से मंजूरी नहीं ली। पूरे मामले में शासन और महानिदेशालय स्तर से मिले निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया।
वर्ष 2011 से 2014 के बीच प्रदेश भर में स्वास्थ्य विभाग ने करीब 900 कर्मियों की आउटसोर्सिंग पर भर्ती की। इसी दौरान टिहरी जिले में 50 चतुर्थ श्रेणी कर्मियों और दो वाहन चालकों की भी भर्ती हुई। संविदा पर उपनल से इन कर्मियों की तैनाती कराई गई। आरोप लगा कि भर्ती से पहले शासन और महानिदेशालय स्तर पर अनुमति नहीं ली गई।
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मामला सामने आने के बाद महानिदेशालय स्तर पर निदेशक डा. आभा ममगाईं की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच दल गठित किया गया। टीम में वित्त नियंत्रक प्रमोद कुमार जोशी, संयुक्त निदेशक डा. प्रकाश वर्मा और वरिष्ठ वित्त अधिकारी सुनील रतूड़ी को बतौर सदस्य शामिल किया गया।
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जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 24 मार्च 2011 को वित्त विभाग ने बिना मंजूरी के नियुक्तियां नहीं करने का शासनादेश जारी किया। इस संबंध में सात मार्च 2011, तीन फरवरी 2014 और 13 फरवरी 2014 को महानिदेशालय स्तर से पत्र जारी किए गए।
उसके बावजूद तत्कालीन सीएमओ और कार्यालय सहायक ने शासन व महानिदेशालय से विधिवत स्वीकृति के बिना 50 चतुर्थ श्रेणी कर्मियों और दो वाहन चालकों को आउटसोर्सिंग पर उपनल से तैनाती कराई। उन्होंने नियम विरुद्ध तैनाती के लिए तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी और कार्यालय सहायक को दोषी ठहराया है।
डेढ़ करोड़ का अनावश्यक खर्च
जांच में यह तथ्य सामने आया कि बिना मंजूरी के की गई इन नियुक्तियों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का अनावश्यक खर्च हुआ। कर्मियों की नियुक्ति और तनख्वाह के रूप में यह धनराशि खर्च हुई।
इस दौरान प्रदेश भर में उपनल के जरिये नियुक्तियां हुई। मैंने शासन और महानिदेशालय की मंजूरी के बाद ही नियुक्तियां की। विधिवत प्रक्रिया का पालन किया गया है। अस्पताल चलाने के लिए कर्मचारियों की भर्ती जरूरी थी। कर्मियों ने काम किया, जिसके एवज में उन्हें मानदेय दिया गया। इसमें कोई घोटाला नहीं है।
- डॉ. सुशील अग्रवाल, तत्कालीन सीएमओ, टिहरी