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सीएम हरीश रावत की अग्नि परीक्षा, कैसे होंगे पास?
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 14 Feb 2016 04:32 PM IST
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आने वाले बजट सत्र में मुख्यमंत्री हरीश रावत की अग्नि परीक्षा है। उनके सामने लोक लुभावन बजट देने और अपने सहयोगियों को साधने जैसी चुनौतियां के साथ विपक्ष से निपटने की चुनौती भी होगी। चुनौतियां इसलिए कि पैसे की तंगी लोक लुभावन बजट के आड़े आएगी और असंतुष्ट इस नाजुक मौके पर मुख्यमंत्री को घेरने से बाज नहीं आएंगे। यह भी सनद रहे कि गैरसैंण विधानसभा सत्र में अपने इरादे जता चुका विपक्ष, चुनावी वर्ष के बजट सत्र में अपने तेवर को और अधिक धार देने की तैयारी में है। प्रदेश का बजट सत्र नौ मार्च से प्रस्तावित है।
चुनावी वर्ष होने के कारण इस बार बजट सत्र खास भी रहेगा। प्रदेश सरकार की कोशिश बजट के जरिये मतदाताओं को लुभाने की भी है। मुसीबत यह है कि इसमें पैसे की कमी का सामना भी प्रदेश सरकार को करना पड़ रहा है। सीमित संसाधनों के चलते मुख्यमंत्री लोक लुभावन बजट कैसे देंगे, यह बड़ा सवाल है। दूसरी ओर, नेता सदन के रूप में मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने असल परीक्षा अपने कुनबे को संभालने की भी है। मुख्यमंत्री हरीश रावत से कुछ मंत्री अंदरखाने असंतुष्ट भी हैं। वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश कई बार मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए परेशानी खड़ी कर ही चुकी हैं। कृषि मंत्री हरक सिंह गैरसैंण मामले में बेबाक होकर मुख्यमंत्री हरीश रावत को, ‘न खाता न बही, हरीश रावत जो कहे, वही सही’ का बयान देने के लिए मजबूर कर चुके हैं।
शनिवार को भी वे पौड़ी में ये कहकर कि मैं जब सच बोलता हूं तो लोग नाराज हो जाते हैं, अपना इरादा जता चुके हैं। राजस्व मंत्री यशपाल आर्य भी फिलहाल मुख्यमंत्री से दूरी बनाकर चलते हुए दिख रहे हैं। इसी तरह, पीडीएफ और मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर सरकार के स्तर से कोई फैसला न होने से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का खेमा भी नाराज है। प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी के आवास पर हुई समन्वय समिति की बैठक में इस खेमे की नाराजगी उभरकर सामने भी आई।
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दूसरी ओर, विपक्ष ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के सहयोगियों को ही निशाना बनाने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।
सत्र के दौरान मंत्रियों की ओर से होमवर्क की कमी का खामियाजा पहले भी सरकार भुगतती आई है। वहीं, विपक्ष गैरसैंण सत्र के दौरान यह जता चुका है कि विरोध को किस स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। पांच दिन के सत्र को सरकार को मजबूरन दो ही दिन में समेटना पड़ा था। ऐसे में बजट सत्र में भी विपक्ष इस बार गैरसैंण के मुद्दे को फिर से उठाने की तैयारी में है। संवासिनी मुद्दे पर सीएम आवास के घेराव की सफलता का स्वाद चख चुके भाजपाई इस मुद्दे पर विधानसभा में मुख्यमंत्री को घेर सकते हैं।
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चुनावी वर्ष होने के कारण इस बार बजट सत्र खास भी रहेगा। प्रदेश सरकार की कोशिश बजट के जरिये मतदाताओं को लुभाने की भी है। मुसीबत यह है कि इसमें पैसे की कमी का सामना भी प्रदेश सरकार को करना पड़ रहा है। सीमित संसाधनों के चलते मुख्यमंत्री लोक लुभावन बजट कैसे देंगे, यह बड़ा सवाल है। दूसरी ओर, नेता सदन के रूप में मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने असल परीक्षा अपने कुनबे को संभालने की भी है। मुख्यमंत्री हरीश रावत से कुछ मंत्री अंदरखाने असंतुष्ट भी हैं। वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश कई बार मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए परेशानी खड़ी कर ही चुकी हैं। कृषि मंत्री हरक सिंह गैरसैंण मामले में बेबाक होकर मुख्यमंत्री हरीश रावत को, ‘न खाता न बही, हरीश रावत जो कहे, वही सही’ का बयान देने के लिए मजबूर कर चुके हैं।
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शनिवार को भी वे पौड़ी में ये कहकर कि मैं जब सच बोलता हूं तो लोग नाराज हो जाते हैं, अपना इरादा जता चुके हैं। राजस्व मंत्री यशपाल आर्य भी फिलहाल मुख्यमंत्री से दूरी बनाकर चलते हुए दिख रहे हैं। इसी तरह, पीडीएफ और मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर सरकार के स्तर से कोई फैसला न होने से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का खेमा भी नाराज है। प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी के आवास पर हुई समन्वय समिति की बैठक में इस खेमे की नाराजगी उभरकर सामने भी आई।
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दूसरी ओर, विपक्ष ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के सहयोगियों को ही निशाना बनाने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।
सत्र के दौरान मंत्रियों की ओर से होमवर्क की कमी का खामियाजा पहले भी सरकार भुगतती आई है। वहीं, विपक्ष गैरसैंण सत्र के दौरान यह जता चुका है कि विरोध को किस स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। पांच दिन के सत्र को सरकार को मजबूरन दो ही दिन में समेटना पड़ा था। ऐसे में बजट सत्र में भी विपक्ष इस बार गैरसैंण के मुद्दे को फिर से उठाने की तैयारी में है। संवासिनी मुद्दे पर सीएम आवास के घेराव की सफलता का स्वाद चख चुके भाजपाई इस मुद्दे पर विधानसभा में मुख्यमंत्री को घेर सकते हैं।