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रामनगर में अमृता की घेराबंदी को तैयार सीएम रावत
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Tue, 14 Jul 2015 03:51 PM IST
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विधानसभा में अपनी वापसी कुमाऊं के धारचूला से की लेकिन करीबियों की ओर से रामनगर से 2017 का चुनाव लड़ने का इशारा कांग्रेस में बड़े परिवर्तन का संकेत दे रहा है।
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मुख्यमंत्री के रामनगर से चुनाव लड़ने का सीधा असर पार्टी में अलग-थलग पड़ी पूर्व मंत्री अमृता रावत पर पड़ना है। पति सतपाल महाराज के भाजपा में जाने के बाद भी अमृता ने कांग्रेस नहीं छोड़ी। हालांकि कांग्रेस तभी से मान बैठी है कि अमृता रावत चुनाव के कुछ महीने पूर्व पार्टी छोड़ देंगी।
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लिहाजा, मुख्यमंत्री का नाम चलाकर अमृता रावत को रामनगर का डर दिखाकर घेराबंदी की जा रही है। ताकि खामोश बैठी अमृता की अगली रणनीति का अंदाजा लगाया जा सके। हरीश रावत मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद अमृता रावत सीधे सोनिया गांधी से मिली थीं और अपना दुखड़ा रोया था।
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बताते हैं कि सोनिया गांधी से भी उन्होंने पार्टी में ही बने रहने की बात कही थी। इस मामले में सोनिया गांधी का हस्तक्षेप होने के कारण तब से सीधे तौर पर कांग्रेस का कोई नेता अमृता रावत के मामले में बयानबाजी नहीं कर रहा है। रामनगर से सीएम के चुनाव लड़ने की खबर से कहीं न कहीं कांग्रेस नेता अमृता रावत की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
ये सच है कि मुख्यमंत्री के लिए रामनगर बेहतर राजनैतिक मैदान हो सकता है। यहां मुस्लिम, सिख और मिलजुली आबादी का राजनैतिक गणित हरीश रावत को सूट करता है। कभी अल्मोड़ा में मिली लगातार हार के बाद अपने राजनैतिक भविष्य को संवारने के लिए हरीश रावत ने गढ़वाल की मैदानी लोकसभा सीट हरिद्वार का रुख किया और सफलता भी पाई।
उत्तराखंड विधानसभा पहुंचने के लिए उन्होंने एक उपचुनाव में कुमाऊं के खाटी पहाड़ी इलाके धारचूला को चुना। अब रामनगर का नाम आने और उनके औद्योगिक सलाहकार रंजीत रावत की इस क्षेत्र में लगातार की जा रही राजनैतिक रेकी इस सवाल को पुख्ता जरूर कर रहे हैं लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो रंजीत रावत की खुद इस सीट पर निगाह है।
विधानसभा चुनाव में रामनगर कहीं न कहीं महत्वपूर्ण विधानसभा होगी। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा रहा है कि काशीपुर को जिला बनाने की तैयारी के साथ रामनगर को उसमें जोड़ा जा सकता है।