उद्गम से ही गंगा में उड़ेली जा रही सीवर की गंदगी
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गंगा और यमुना को प्रदूषित करने वालों पर नकेल कसने वाले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की नजरें इन नदियों के उद्गम स्थल तक नहीं पहुंच सकी हैं।
उत्तराखंड में इनके उद्गम में धड़ल्ले से कचरा और मलबा ही नहीं वरन सीवर की गंदगी भी इन नदियों में उडे़ली जा रही है। बीते दिनों भी जिला मुख्यालय के पास बूचड़खाने की गंदगी सीधे गंगा में उड़ेले जाने का मामला प्रकाश में आया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
गंगा एवं यमुना के उद्गम जिले उत्तरकाशी में इन नदियों के किनारे बसी बस्तियों में अभी तक सीवर ट्रीटमेंट के इंतजाम नहीं हो पाए हैं।
उत्तरकाशी जिला मुख्यालय के लिए बनी सीवर ट्रीटमेंट योजना अगस्त 2012 की बाढ़ से क्षतिग्रस्त पड़ी है और अधिकांश सीवर की गंदगी सीधे गंगा भागीरथी में उड़ेली जा रही है। अन्य स्थानों पर भी सीवर की गंदगी प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से इन नदियों में बहाई जा रही है।
सड़कों का मलबा सीधे नदियों में
यहां निर्माणाधीन बिजली परियोजनाएं हों या फिर सड़कों का मलबा भी सीधे नदियों में ही डाला जाता है। निस्तारण की व्यवस्था न होने से तटवर्ती बस्तियों का तमाम कचरा भी प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से इन नदियों में ही उड़ेला जा रहा है।
बीते नौ जनवरी को तो हद ही हो गई, जब जिला मुख्यालय के निकट तिलोथ में चल रहे बूचड़खाने से जानवरों की हड्डियां आदि तमाम अपशिष्ट सीधे गंगा में उड़ेले जाने का मामला प्रकाश में आया।
प्रशासन ने भी बूचड़खाने का लाइसेंस निरस्त कर तथा इसे बंद कराकर इतिश्री कर ली। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
उत्तरकाशी मुख्यालय की सीवर ट्रीटमेंट योजना पहले अगस्त 2012 और फिर जून 2013 की बाढ़ में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसे दुरुस्त कराने के लिए पांच करोड़ की मांग की गई है। अभी तक बजट नहीं मिल सका है। फिलहाल मुख्यालय तथा इससे सटे बड़े आबादी क्षेत्र का करीब तीन चौथाई सीवर गंगा में ही जा रहा है।
- सुरेश पाल, परियोजना प्रबंधक गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई उत्तरकाशी
बूचड़खाने की गंदगी गंगा में उड़ेले जाने का मामला संज्ञान में आते ही इसकी सफाई कराने के साथ ही बूचड़खाना बंद करा दिया गया था। इस मामले में बूचड़खानों को लाइसेंस देने वाली जिला पंचायत से भी जानकारी मांगी गई है। फिलहाल इसमें कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
- केके सिंह, एसडीएम उत्तरकाशी