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उत्तराखंडः अंग्रेजों के जमाने से पुलिस में है यह परिवार
अनिल चमोली/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 06 Jul 2015 03:31 PM IST
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सिविल सर्विस परीक्षा में 215वीं रैंक पाने वाली और भविष्य की आईपीएस रचिता जुयाल का परिवार अंग्रेजों के जमाने से पुलिस सेवा से जुड़ा है।
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रचिता के दादा ईश्वरी प्रसाद के दादा गंगाधर प्रसाद वायसराय लार्ड कर्जन के जमाने में थाना प्रभारी थे। लार्ड कर्जन उनके काम से इतने प्रभावित हुए कि उनको विक्टोरिया मेडल से सम्मानित किया। तब से एक पीढ़ी को छोड़ दिया जाए तो लगातार यह परिवार पुलिस सेवा से जुड़ा है।
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जुयाल परिवार मूलरूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के थलीसैंण तहसील पट्टी बंगारस्यूं घिवंई गांव के रहने वाला है। अंग्रेजों के जमाने में इस परिवार से सबसे पहले गंगाधर जुयाल साल 1890 में तत्कालीन संयुक्त प्रांत (वर्तमान यूपी) के सदर बाजार शाहजहांपुर के थाना प्रभारी बने। वर्ष 1901-2004 तक वर्तमान उत्तराखंड के सर्किल इंस्पेक्टर बने।
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इसी दौरान वायसराय लार्ड कर्जन उत्तराखंड भ्रमण पर आये। इससे जुड़ी व्यवस्था की जिम्मेदारी गंगाधर जुयाल को सौंपी गई। बताया जाता है कि यहां के प्रबंध से वायसराय इतने खुश हुए कि उन्होंने गंगाधर जुयाल को विक्टोरिया मेडल से नवाजा। गंगाधर के बेटे वंशीधर को अंग्रेजों ने मालगुजारी बनाया था।
इनको कई गांवों से टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद की सारी पीढ़ी फिर पुलिस प्रशासन से जुड़ी रही। इनके तीन बेटे हुए, जिसमें योगेश्वर प्रसाद जुयाल और ईश्वरी प्रसाद जुयाल (रचिता के दादा) पुलिस में भर्ती हुए।
योगेश्वर प्रसाद के तीन बेटे हुए जिसमें एमपी जुयाल और डीपी जुयाल रिटायर्ड डीएसपी हैं। जबकि जेपी जुयाल हरिद्वार में इंस्पेक्टर हैं। ईश्वरीप्रसाद जुयाल के बेटे बीडी जुयाल सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर हैं। इनकी बेटी रचिता अब आईपीएस बनेगी।
मेडल खोने का मलाल
अंग्रेजों के समय से पुलिस में सेवा देने वाले जुयाल परिवार को गंगाधर जुयाल को मिले मेडल के खोेने का बड़ा मलाल है। राष्ट्रपति पदक व भारतीय पुलिस पदक से सम्मानित उत्तराखंड पुलिस से डीएसपी के पद से रिटायर्ड और काशीपुर में रह रहे डीपी जुयाल का कहना है कि उनके चाचा ईश्वरी प्रसाद ने बताया था कि गांव के पुराने घर में अंग्रेजों से मिला मेडल रखा है।
डीपी जुयाल बताते हैं कि पूरा घर खंगाला पर कहीं मेडल नहीं मिला। इस दौरान पुरानी पोथियां और किताबों के साथ 1860 में बने इंडियन पैनल कोड (आईपीएसी) की पुस्तक जरूर मिली। वह बताते हैं इसी पुस्तक के पहले पेज में हाथ से लिखा है कि गंगाधर जुयाल थाना प्रभारी सदर बाजार शाहजहांपुर। उनका कहना है कि यह पुस्तक उन्होंने संभालकर रखी है।
रचिता ने अपने परिवार में हमेशा पुलिस वर्दी को देखा है। कहीं न कहीं इस बात ने उसके लिए प्रेरणा का काम किया होगा। परिवार के लोग प्रमोशन से अधिकारी बने पर बेटी सीधे पुलिस अधिकारी बनेगी। पूरे परिवार के लिए यह सम्मान का विषय है।
- बीडी जुयाल, रचिता के पिता