भारत की इस स्मार्ट सिटी में बढ़ेगी चीन की हिस्सेदारी!
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देहरादून में प्रस्तावित स्मार्ट सिटी में चीन की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। मौजूदा एमओयू में उत्तराखंड सरकार पर अधिक वित्तीय बोझ पड़ने का तर्क दिया जा रहा है।
एमओयू में चीनी विश्वविद्यालय को 60 फीसदी की हिस्सेदारी दी गई है। जबकि विवि 74 फीसदी तक हिस्सेदारी की पेशकश कर चुकी है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर फाइनल मुहर लगने से पहले आयोजित हुई हाई पावर कमेटी की बैठक में भी अधिकतर अधिकारियों ने इस पर सहमति जताई थी।
बता दें कि केंद्र सरकार ने राज्यों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट जमा करने के लिए 15 दिसंबर तक का समय दिया था। इससे पहले राज्य सरकार को प्रोजेक्ट के लिए न्यूनतम 250 एकड़ जमीन पर कब्जा लेना आवश्यक था। साथ ही राज्य की हिस्सेदारी का वित्तीय प्रबंधन कैसे होगा, इसका भी ब्योरा देना था।
राज्य सरकार ने स्मार्ट शहर में हिस्सेदारी पर चीन की तोंगजी विवि से एमओयू किया। चीनी विवि ने प्रोजेक्ट में 74 फीसदी तक इक्विटी शेयर (हिस्सेदारी) की पेशकश की। हालांकि राज्य सरकार ने स्थानीय मुद्दों को देखते हुए 40 फीसदी तक हिस्सेदारी अपने पास ही रखी है।
चीनी विवि की हिस्सेदारी 74 फीसदी तक करने पर जोर
उत्तराखंड सरकार ने केंद्र को करीब 2800 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें से 1680 करोड़ रुपये का निवेश चीनी विवि और 1120 करोड़ रुपये का निवेश राज्य सरकार को करना होगा।
राज्य सरकार इसके लिए हाउसिंग एंड अरबन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) से लोन लेने जा रही है, जिस पर सहमति बन चुकी है। सूत्रों के अनुसार, शासन स्तर पर अधिकारियों के बीच इक्विटी शेयर को लेकर एक राय नहीं बन पाई है।
ज्यादातर अधिकारी राज्य पर अधिक बोझ पड़ने का तर्क देते हुए चीनी विवि की हिस्सेदारी 74 फीसदी तक करने पर जोर दे रहे हैं।
तो कैसे बनेगी स्मार्ट टाउनशिप?
मुख्यमंत्री हरीश रावत देहरादून में बनने वाली स्मार्ट सिटी से होने वाली कमाई से पहाड़ में स्मार्ट टाउनशिप विकसित करने का दावा कर रहे हैं।
अगर स्मार्ट सिटी में दून की हिस्सेदारी कम हुई तो स्वाभाविक है कि बाद में कमाई भी कम होगी। ऐसे में पहाड़ में स्मार्ट टाउनशिप विकसित करने के लिए धनराशि की व्यवस्था मुश्किल हो जाएगी।