फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   children who orphaned by the disaster left village

आपदा में अनाथ बच्चों ने छोड़ा गांव तो बिलख पड़े गांव वाले

Fri, 12 Aug 2016 03:52 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नाचनी (पिथौरागढ़)
ब्यूरो / अमर उजाला, नाचनी (पिथौरागढ़) Updated Fri, 12 Aug 2016 03:52 PM IST
विज्ञापन
children who orphaned by the disaster left village
children who orphaned by the disaster left village - फोटो : amar ujala

पिथौरागढ़ में आपदा प्रभावित गांव कुमालगौन का दर्द 40 दिन बाद एक बार फिर उस वक्त छलक पड़ा जब यहां के तीन बच्चे बेहतर भविष्य की आस में अपनी जड़ों से दूर हो गए।

विज्ञापन


आपदा में परिवार का बिखरना और अनाथ बच्चों का अपने गांव और गलियों से दूर का दर्द कोई कुमालगौन के लोगों से पूछे। प्रकृति के कहर में माता-पिता और भाई को गंवाने के बाद अनाथ बच्चे जब बृहस्पतिवार सुबह 8.30 बजे टिहरी के लिए विदा हुए तो माहौल काफी गमगीन हो गया।
विज्ञापन


बच्चों के संगी-साथी, नाते-रिश्तेदार और गांववासियों, हर किसी की आंखें छलक पड़ीं। कई साथी तो फूट-फूट कर रोने लगे। तीन बच्चों को पंतजलि योगपीठ के टिहरी स्थित आवासीय विद्यालय भेजा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कुमालगौन में 30 जून की रात बादल फटने के बाद मकान जमींदोज होने से बचीराम, उनकी पत्नी पार्वती देवी और बड़े बेटे मनोज की मौत हो गई थी जबकि उनके तीन बच्चे 16 वर्षीय कमलेश, 14 वर्षीय ललित और 12 वर्षीय निर्मला बच गए थे। अब तक यह तीनों बच्चे अपने ताऊ बहादुर राम के संरक्षण में नाचनी स्थित राहत कैंप में रह रहे थे।

बच्चों को पतंजलि योगपीठ के आवासीय विद्यालय भेजा

children who orphaned by the disaster left village
children who orphaned by the disaster left village

मुनस्यारी के एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा ने बताया कि तीनों बच्चों को गोद लेने, उनका भरण-पोषण करने के लिए कई संस्थाओं और व्यक्तियों ने संपर्क किया था। काफी सोच विचार के इन बच्चों को पतंजलि योगपीठ के आवासीय विद्यालय भेजने का निर्णय लिया गया।

जब पतंजलि आवासीय स्कूल से स्वीकृति मिली तो बच्चों को टिहरी भेजने की व्यवस्था की गई। बच्चों के साथ डीडीहाट के राजस्व निरीक्षक केएस भंडारी, सिंघाली प्राथमिक स्कूल की शिक्षिका मंजू पोखरिया और पैरालीगल वालेंटियर मंजू चौहान और बच्चों के चाचा बहादुर राम भी साथ गए हैं।
 
कमलेश इस समय जीआईसी थल में कक्षा दस में, ललित नौ में और निर्मला कन्या जूनियर हाईस्कूल नौलड़ा में सात में पढ़ती है। एसडीएम ने बताया कि तीनों बच्चों को इन्हीं कक्षाओं में ही प्रवेश मिलेगा।

विदाई के समय निर्मला की सहेली पूजा और हेमा तो बिलख-बिलख कर रो पड़ीं। भारी संख्या में लोग बच्चों को छोड़ने आए थे। माहौल इतना गमगीन हो गया कि हर किसी के आंख से अश्रुधारा बहने लगी। आपदा में परिवार का बिखरना और बच्चों के अपनों से दूर होने की पीड़ा सभी को थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed