पढ़ाई के लिए इन बच्चों में ऐसा जज्बा की कोर्ट जाने से भी नहीं चूके
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उत्तराखंड सरकार को भले ही न सुनाई दी हो, लेकिन न्याय के मंदिर में बच्चों की गुहार आखिरकार सुन ली गई।
एक स्पेशल अपील की सुनवाई के दौरान बागेश्वर के बच्चों के पत्र का संज्ञान लेते हुए हाइकोर्ट ने मंगलवार को 5500 अतिथि शिक्षकों को दो माह तक पद पर बने रहने देने का निर्देश सरकार को दिया। हाइकोर्ट ने सरकार को इन पदों पर नियमित नियुक्ति का भी आदेश दिया है।
अल्मोड़ा के कुछ स्कूलों के छात्रों ने कुछ दिन पहले ही हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अतिथि शिक्षकों के हटाए जाने पर पढ़ाई के प्रभावित होने की चिंता जताई थी। इसी मामले में एक स्पेशल अपील पर भी हाइकोर्ट में सुनवाई जारी थी।
अतिथि शिक्षकों के न होने से पढ़ाई पर पड़ रहा बुरा प्रभाव
ललित मोहन व अन्य ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दायर कर दस अगस्त 2016 के एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एकलपीठ ने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति को गलत मानते हुए सरकार की ओर से अप्रैल 2014 को जारी शासनादेश को निरस्त कर दिया था।
एकलपीठ ने अपने आदेश में अतिथि शिक्षकों को 31 मार्च 2017 तक ही पद पर बने रहने के निर्देश दिए थे। अपील में कहा गया था कि विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों के न होने से छात्रों की पढ़ाई पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। दुर्गम क्षेत्रों में स्थिति काफी बदहाल हो चुकी है।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पक्षों की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने 5500 अतिथि शिक्षकों को राहत देते हुए कहा कि अतिथि शिक्षक दो माह तक काम पर बने रहेंगे। साथ ही न्यायालय ने सरकार को यह भी आदेशित किया है कि वह विज्ञापन जारी कर इन पदों को नियमित भर्ती करे।