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एक फिल्म ने बदली इन साइलेंट हीरोज की जिंदगी

Tue, 23 Feb 2016 03:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 23 Feb 2016 03:14 AM IST
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child actor of silent heroes film met with KK paul.

अरे वो देखो ‘साइलेंट हीरोज’ जा रहे हैं। 11 दिसंबर-2015 को देश भर में प्रदर्शित होने के बाद फिल्म ‘द साइलेंट हीरोज’ में काम करने वाले मूक बधिर बच्चों की जिंदगी कुछ इसी तरह बदली है। घर हो या बाहर, बस हो या ट्रेन हर जगह लोग इन्हें पहचान लेते हैं। लोग इनके घर जाकर ऑटोग्राफ मांगते हैं। इस फिल्म ने इन्हें न केवल नई पहचान दी है, बल्कि नये सपने बुनने के हौसले भी दिए हैं। फिल्म में भूमिका निभाने वाले दून के 13 छात्रों की आंखों में अब अभिनय का सपना भी पलने लगा है।

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‘द साइलेंट हीरोज’ दुनिया की पहली ऐसी फिल्म है, जिसमें मूक बधिर बच्चों की भूमिका मूक बधिर बच्चों ने ही निभाई है। इस फिल्म के बाद लोगों का नजरिया इनके लिए काफी बदल गया है। अपने अभिनय से इन बच्चों ने साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं हैं। फिल्म के रिलीज होने के बाद लोगों ने इसे काफी पसंद किया है।
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लोग घर आकर मांगते हैं ऑटोग्राफ
मणि युगांधर के दो बेटों ने फिल्म में काम किया है। मणि बीएलआई में टीचर हैं। मणि ने बताया कि फिल्म क्या रिलीज हुई बच्चे हीरो बन गए। अब तो हर कोई घर बेटों के ऑटोग्राफ लेने आता है। वह कहती हैं कि दोनों बच्चे पढ़ाई में अच्छे हैं। इन्होंने हमारा मान बढ़ाया है।

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ख्वाहिश पूरी कर रही ‘ख्वाहिश’, जानिए इनके सपने

child actor of silent heroes film met with KK paul.

ख्वाहिश की मां भानू गुप्ता बीएलआई में टीचर हैं। भानू ने बताया कि ख्वाहिश ने जिस तरह से अभिनय किया, उससे हमारा मान बढ़ गया। मैं बहुत लकी हूं कि मुझे ख्वाहिश मिली। ख्वाहिश की वजह से मैं मूक बधिर इंस्टीट्यूट में टीचर हूं। ख्वाहिश आईएएस बनने का सपना देखती है, जिसे हम मिलकर पूरा करेंगे।

साइलेंट हीरोज के सपने
राजपुर रोड स्थित बजाज लर्निंग इंस्टीट्यूट (बीएलआई) में पढ़ने वाले इन छात्रों में विभिन्न तरह के सपने पल रहे हैं। शालिनी रावत, समरीन, उजैफ, गुलफरीन अभिनय के क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहते हैं। प्रखर चमोली एयरोनॉटिक्स में इंजीनियर बनना चाहते हैं। ख्वाहिश आईएएस, तरुण सीए, जयदीप और रेणु खेल के क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहते हैं। आशीष, राधिका, श्वेता कंप्यूटर इंजीनियर और निखिल डॉक्टर बनना चाहते हैं।

फिल्म में बचाते हैं प्रशिक्षक की जान

child actor of silent heroes film met with KK paul.

फिल्म में दिखाया गया है कि प्रशिक्षक बच्चों का मजाक उड़ाता है कि वह साहसिक गतिविधियां नहीं कर सकते। कोच बात-बात पर बच्चों की बेइज्जती करता है। लेकिन एक हादसे में यह बच्चे उसी प्रशिक्षक की जान बचाते हैं। निम से माउंटेरिंग का कोर्स कर यह 13 बच्चे उत्तरकाशी, ऊखीमठ, चोपता, ऋषिकेश आदि जगहों पर साहसिक गतिविधियों में भाग लेते हैं।

‘द साइलेंट हीरोज’ के देशभर में प्रदर्शित होने के बाद बच्चों को काफी प्रसिद्धि मिली है। यह फिल्म अब तक गोवा, कोलकाता, म्यांमार आदि जगहों में आयोजित फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा चुकी है। फिल्म का दूसरा भाग भी बनेगा। बच्चों को फिल्म में अभिनय के लिए पैसे नहीं मिले हैं। हम चाहते थे कि एक बार बच्चे अपने अभिनय से साबित कर दें कि वह निशक्त नहीं हैं। आवश्यकता पड़ने पर वह किसी की भी मदद कर सकते हैं। इन्होंने यह कर दिखाया। अब हम चाहेंगे कि यह अभिनय में आगे बढ़ें और इन्हें इसका मेहनताना मिले।
-अंजलि अग्रवाल, प्रधानाचार्या, बीएलआई।

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