CM त्रिवेंद्र ने अपने मोबाइल से जोड़े प्रदेश के कई अस्पताल, 24 घंटे रखेंगे निगरानी
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प्रदेश के अस्पतालों को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मोबाइल से लिंक कर दिया गया है। मुख्यमंत्री अब खुद इन अस्पतालों पर नजर रखे हुए हैं। वो ओपीडी और वार्ड सहित अस्पताल की विभिन्न गतिविधियों को अपने मोबाइल के जरिये देख पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ.नवीन बलूनी के मुताबिक प्रदेश के 27 अस्पतालों में सीसीटीवी लगाए गए हैं। इनमें से फिलहाल 10 अस्पतालों को मुख्यमंत्री के मोबाइल और स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय से लिंक कर दिया है, अन्य अस्पतालों को भी मुख्यमंत्री के मोबाइल से लिंक किया जाएगा।
पहाड़ के दूरदराज के अस्पतालों में डाक्टर हैं या नहीं और वार्ड में मरीजों की स्थिति का अब राजधानी में बैठकर पता लगाया जा सकेगा। किसी अस्पताल से कोई शिकायत मिलने पर मौके पर ही मोबाइल और महानिदेशालय कार्यालय में लगे सिस्टम में देखकर इसका निस्तारण हो सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों में डाक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित किए जाने के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था किए जाने के बाद अब 27 अस्पतालों में प्रत्येक में पांच से दस सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं।
इन कैमरों को सीएम के मोबाइल से लिंक करने के साथ ही स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय में लगे सिस्टम से भी जोड़ा गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पहाड़ के दूरदराज के अस्पतालों पर सीधे मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य महानिदेशालय की नजर होने से डाक्टर अस्पतालों से बंक नहीं मार सकेंगे।
सीएम के मोबाइल और डीजी ऑफिस से जुड़े ये अस्पताल
वही अस्पताल में किसी भी तरह की शिकायत का मौके पर निस्तारण हो सकेगा। फिलहाल वाईफाई के जरिये दस अस्पतालों को लिंक किया गया है। डॉ.नवीन बलूनी ने बताया कि कुछ अस्पतालों को सीएम के मोबाइल से लिंक किया गया है, जल्द ही अन्य अस्पतालों को भी उनके मोबाइल से लिंक कर दिया जाएगा।
सीएम के मोबाइल और डीजी ऑफिस से जुड़े ये अस्पताल
दून का कोरोनेशन, प्रेमनगर का संयुक्त चिकित्सालय, जिला अस्पताल बौराड़ी टिहरी, जिला अस्पताल पौड़ी, बेस अस्पताल हल्द्वानी, जिला अस्पताल हरिद्वार, संयुक्त चिकित्सालय नरेंद्रनगर, जिला अस्पताल बागेश्वर, नागरिक चिकित्सालय रानीखेत, जिला अस्पताल अल्मोड़ा।
अस्पतालों में है डाक्टरों की कमी
पहाड़ के दूरदराज के अस्पतालों को मुख्यमंत्री के मोबाइल से लिंक किया गया है, लेकिन अस्पतालों में डाक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। जिससे मरीजों को आए दिन भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। बता दें कि प्रदेश भर में डाक्टरों के 60 फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं।