फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Chhath puja 2021: Chhath Festival starts from today in Many special Coincidence

Chhath puja 2021: नहाय-खाय के साथ आज से शुरू चार दिवसीय छठ पर्व, बन रहे कई योग

Mon, 08 Nov 2021 12:30 AM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 08 Nov 2021 12:30 AM IST
सार

Chhath puja 2021: भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि नहाय खाय से लेकर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने तक कई योग बन रहे हैं। जो शुभ फल प्रदान करने वाले हैं।

विज्ञापन
Chhath puja 2021: Chhath Festival starts from today in Many special Coincidence
छठ पूजा - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान नहाय खाय के साथ आज (सोमवार) से शुरू हो गया है। छठ महापर्व के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं।  महापर्व छठ के अनुष्ठान पर ग्रह गोचरों का शुभ संयोग बन रहा है। 

विज्ञापन


शुभ फल प्रदान करने वाले कई योग
भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि नहाय खाय से लेकर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने तक कई योग बन रहे हैं। जो शुभ फल प्रदान करने वाले हैं। उन्होंने बताया कि नहाय खाय के दिन सूर्य से तीसरे भाव में चंद्रमा होने से वरिष्ठ योग एवं सूर्य व बुध साथ होने से बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है।
विज्ञापन


इस योग में व्रती नहाय खाय पर गंगा स्नान करने के बाद अरवा चावल चने की दाल व कद्दू की सब्जी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही नौ नवंबर को खरना के दिन रस केसरी योग बना रहा है। 10 नवंबर को गज केसरी योग में व्रती सायंकालीन अर्घ्य देंगे। वहीं उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पराक्रम योग बन रहा है। जिसमें व्रती अपने व्रत का समापन करेंगे।  
विज्ञापन
विज्ञापन


सादगी व पवित्रता छठ पूजा की पहचान 
छठ पूजा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी, पवित्रता, भक्ति एवं आध्यात्म है। इसकी उपासना पद्धति सरल है। इसमें किसी आचार्य की आवश्यकता नहीं है। यह लौकिक रीति-रिवाज एवं ग्रामीण जीवन पर आधारित है। 

महाभारत काल से प्रचलित है व्रत 

हिंदू धर्म के अधिकांश व्रत महिलाएं ही करती हैं, पर छठ पर्व में पूरा परिवार शामिल हो जाता है। छठ पर्व की शुरूआत महाभारत काल से मानी जाती है। पांडव जब वनवास काट रहे थे तो द्रोपदी ने कुल पुरोहित की आज्ञा प्राप्त होने पर युधिष्ठिर के साथ छठ व्रत पूजन किया था। सूर्यदेव ने प्रसन्न होकर युधिष्ठिर को अछूत ताम्रपात्र प्रदान किया। जिससे मुधर स्वादिष्ट भोजन हमेशा उपलब्ध रहता था। नारायण ज्योतिष संस्थान के विकास जोशी ने बताया कि द्रोपदी के व्रत पूजन से प्रसन्न होकर भगवान सूर्य (छठ माता) ने युधिष्ठिर को को राजपाट, धन दौलत, वैभव मान सम्मान, यश कीर्ति पुन: प्रदान किया। 

छह पूजा कार्यक्रम पर एक नजर 
- नहाय-खाय: छठ पर्व का प्रथम दिन नहाए खाय से शुरू होता है। नहाए-खाय आठ नवंबर को है। 
- खरना : छठ व्रत का दूसरा दिन खरना नौ नवंबर को हैं। इस दिन पंचमी तिथि है। इसके बाद षष्ठी शुरू होगी। 
- सायंकालीन अर्घ्य : छठ पर्व के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल पष्ठी को पूर्ण उपवास होता है। यह व्रत दस नवंबर को है। 
- प्रात कालीन अर्घ्य : पष्ठी व्रत की पूर्णाहुति चतुर्थ दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होती है। 11 नवंबर को प्रातकालीन अर्घ्य दिया जाता है। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed