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कैमरे में दून अस्पताल का सच, देखिए OPD में क्या कर रहा केमिस्ट

Sat, 07 Nov 2015 03:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 07 Nov 2015 03:26 PM IST
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chemist writing prescription in doon hospital.

दून अस्पताल के कई डॉक्टरों की ओपीडी पर दवा की दुकान चलाने वाले केमिस्ट का कब्जा है। आलम यह है कि केमिस्ट ना केवल डॉक्टर के साथ बैठकर मरीजों के पर्चे देखता है बल्कि कई बार खुद ही दवा लिख देता है। डॉक्टरों के साथ वाली कुर्सी पर बैठकर वह मरीजों को अपनी दुकान से दवा खरीदने को कहता है।

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मरीज भी उसे अस्पताल स्टाफ समझकर बात मान लेते हैं। कमीशनबाजी के इस खेल में अस्पताल के कई डॉक्टर शामिल हैं। अस्पताल प्रबंधन भी सब कुछ जानने के बावजूद अनजान बना हुआ है।
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अस्पताल के कई डॉक्टरों को चाय-काफी और जूस पिलाने के बहाने केमिस्ट उनकी ओपीडी में पहुंच डॉक्टर के बगल वाली कुर्सी कब्जा लेता है और मरीजों को दवाएं तक बताने लगता है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन को भी जानकारी है। पहले केमिस्ट के ओपीडी कक्ष में घुसने पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब स्थिति फिर पहले वाली हो गई है।
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केमिस्ट के डॉक्टरों की ओपीडी में बैठकर मरीजों को डांटने-धमकाने से लेकर दवाएं लिखने तक के वीडियो और फोटो सोशल साइटों पर तैर रहे हैं। इन तस्वीरों और वीडियो में बगल वाली कुर्सी पर बैठे डॉक्टर भी साफ देखे जा सकते हैं।

डॉक्टरों को मिलते हैं कमीशन और गिफ्ट

chemist writing prescription in doon hospital.

सूत्रों की माने तो इसके पीछे कमीशन का मोटा खेल है। केमिस्ट मरीजों को अपनी दुकान से दवा लेने के लिए मजबूर करता है। वह डॉक्टरों पर भी अपनी दुकान की दवाएं लिखने के लिए दबाव बनाता है। इसके लिए कई डॉक्टरों को कमीशन और गिफ्ट भी दिए जाते हैं। अस्पताल प्रबंधन सब कुछ जानने के बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहा है।

बचाव में प्रबंधन
अस्पताल के पीएमएस डा. आरएस असवाल आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के बजाय बचाव कर रहे हैं। उनके सामने जब मामले की शिकायत की गई तो उन्होंने आरोपी को समाजसेवी बताया। उन्होंने कहा कि वह व्यवस्था बनाने में डॉक्टरों की मदद कर रहा है। जब उन्हें आरोपी के पर्चे जमा करते और डॉक्टर के बगल वाली कुर्सी पर बैठकर दवा लिखने के वीडियो दिखाए, तब उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

इनका है कहना
सेवा के उद्देश्य से अगर कोई ऐसा करे तो ठीक है, लेकिन जबरन दवा लिखने या किसी खास दुकान से खरीदने के लिए मजबूर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं।
-डॉ. आरएस असवाल, पीएमएस, दून अस्पताल

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