पढ़िए, कैसे बंद होते हैं चारधाम के कपाट?
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भगवान शिव के 11वें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ मंदिर के कपाट शुभ लग्नानुसार भैया दूज के पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। सुबह 7.55 बजे बाबा केदार की डोली मंदिर की परिक्रमा करने के बाद शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ की ओर रवाना हुई।
करीब 24 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद शाम करीब चार बजे भक्तों और कुमाऊं रेजीमेंट की वाद्य टीम के साथ डोली प्रथम पड़ाव स्थल रामपुर पहुंच गई।
बाबा की डोली 27 अक्तूबर को ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी, जहां शीतकाल के छह माह बाबा केदार की पूजा अर्चना की जाएगी।
कपाट बंद होने से पहले शनिवार तड़के करीब चार बजे मुख्य पुजारी गंगाधर लिंग ने गर्भगृह में प्रवेश किया। उन्होंने भगवान के स्वयंभू लिंग की पूजा करते हुए समाधि रूप दिया। सुबह 6.21 बजे बजे मंदिर के गर्भगृह के पट बंद कर कर दिए गए। इसके बाद सभा मंडप में बाबा केदार की पंचमुखी प्रतिमा को उत्सव डोली में रखकर सजाया गया।
मंदिर की परिक्रमा कर विदा लेती है डोली
7.44 बजे बाबा की डोली मंदिर से बाहर लाई गई। मंदिर की परिक्रमा करने के बाद 7.55 बजे डोली धाम से रवाना हो गई। शिवभक्तों के साथ केदार डोली छानी चट्टी, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग से होते हुए रामपुर पहुंच गई। रविवार को डोली गुप्तकाशी पहुंचेगी।
कपाट बंद होने के मौके पर एसडीएम यूएस चौहान और लक्ष्मीराज चौहान, पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह और चौकी प्रभारी वीसी पाठक भी मौजूद थे।
केदारनाथ में हुई बर्फबारी
सुबह डोली रवाना होते समय केदारनाथ सहित पैदल मार्ग में मौसम साफ था, लेकिन दोपहर तक मौसम का मिजाज बदल गया। लगभग सवा एक बजे से केदारनाथ धाम में बर्फबारी शुरू हो गई। लगभग दो घंटे हुई बर्फबारी से धाम में दो इंच बर्फ की चादर बिछ गई। वहीं पैदल मार्ग पर जोरदार बारिश हुई।
234 श्रद्धालु बने साक्षी
कपाट बंद होने के मौके पर 234 श्रद्धालुओं ने केदारनाथ के दर्शन किए। इस वर्ष मात्र 40 हजार 832 श्रद्धालु ही केदारनाथ पहुंच पाए।
भाई शनि के जाने के बाद विदा हुई मां यमुना
उत्तरकाशी। भैया दूज के पावन पर्व पर शनिवार दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर विधि विधान के साथ यमुनोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। यमुनोत्री से यमुना जी की उत्सव मूर्ति को डोली यात्रा के साथ खरसाली पहुंचाया गया।
शनिवार सुबह 8.45 बजे खरसाली से यमुना के भाई समेश्वर (शनि) देवता की डोली यमुनोत्री के लिए रवाना हुई। यमुनोत्री में विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ अभिजित मुहूर्त पर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर यमुनोत्री मंदिर के कपाट बंद किए गए।
यहां से यमुना जी की उत्सव मूर्ति को डोली यात्रा के साथ तीर्थ पुरोहितों के गांव खरसाली लाया गया। यहां ग्रामीणों ने यमुना का भव्य स्वागत किया। अब शीतकाल में यहीं यमुना जी के दर्शन और पूजा-अर्चना की जाएगी।