फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   char dham yatra weak preparation

चारधाम यात्रा का शोर, लेकिन ढांचा कमजोर

Mon, 24 Apr 2017 03:58 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 24 Apr 2017 03:58 PM IST
विज्ञापन
char dham yatra weak preparation
चार धाम - फोटो : file photo

चारधाम यात्रा का एक बार फिर शोर है। राज्य सरकार की मशीनरी तैयारियों के लिहाज से पुराने ढर्रे पर काम कर रही है। एक बार फिर यात्रा के दौरान चारधाम यात्रा विकास परिषद जैसी संस्था की कमजोरी सामने है।

विज्ञापन


राज्य सरकार की चारधाम यात्रा विकास परिषद को लेकर मंशा भी स्पष्ट नहीं है। सरकार यदि इस संस्था को मजबूत बनाकर यात्रा की मॉनीटरिंग कराना भी चाहे, तो अब समय नहीं रह गया है।
विज्ञापन


हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि चारधाम यात्रा के सफल संचालन के लिए जो भी करना होगा, वो किया जाएगा। चार धाम यात्रा का शुभारंभ इस बार 28 अप्रैल से हो रहा है। अक्षय तृतीया के मौके पर इस दिन गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


जगमोहन के सुझाव पर एनडी ने बनाई थी परिषद
- 2002 में प्रदेश में एनडी सरकार गठित होने के बाद तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री जगमोहन उत्तराखंड आए थे। इससे पहले, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने वहां पर वैष्णो देवी यात्रा को नए पैटर्न पर शुरू कराया था। केंद्रीय पर्यटन मंत्री बतौर उन्होंने तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी को चारधाम यात्रा विकास परिषद का सुझाव दिया था, जिस पर तुरंत कार्रवाई कर दी गई थी। इस परिषद में सीएम को पदेन अध्यक्ष बनाया गया है। इस परिषद में पर्यटन, धर्मस्व और तीर्थाटन विभाग के अफसरों को शामिल किया गया है, मगर इस संस्था का पूरा ढांचा खड़ा नहीं हो पाया है। कांग्रेस के बाद बीजेपी सरकार में भी ये परिषद सिर्फ एक दायित्वधारी की नियुक्ति करने तक का जरिया बनकर रह गई। इस परिषद में राज्य सरकार की ओर से उपाध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है।

इसलिए जरूरी है चारधाम यात्रा विकास परिषद
- उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री शामिल हैं। इनमें से दो मंदिरों बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर का संपूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण मंदिर समिति के पास है। गंगोत्री और यमुनोत्री का प्रशासनिक नियंत्रण अलग-अलग समितियों के बीच बंटा हुआ है। इस वजह से चारों धामों की यात्रा के दौरान तालमेल की कमी साफ नजर आती है, हालांकि शासन स्तर पर मॉनीटरिंग की जाती है, लेकिन वह बहुत प्रभावी नहीं रहती। इस वजह से ही प्रभावशाली परिषद की जरूरत शुरू से महसूस की जा रही है।

चारधाम यात्रा उत्तराखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि यात्रियों को कोई असुविधा न हो। यात्रा की बेहतरी के लिए सरकार हरसंभव उपाय करेगी।

- सतपाल महाराज, पर्यटन, तीर्थाटन व धर्मस्व मंत्री

मोदी-योगी युग में केदारनाथ में केदार गऊ
मोदी-योगी युग की छाप केदारनाथ धाम में दिखाई देनी शुरू हो गई है। पहली बार मंदिर समिति ने ये फैसला किया है कि दुग्धाभिषेक पैकेड दूध से नहीं किया जाएगा। इसके लिए दो गायों को मंदिर समिति ने खरीद लिया है। केदारनाथ में केदार गऊ नाम से इस बार गोशाला भी बनाई जा रही है। केदार गऊ गोशाला के निर्माण से लेकर गायों की खरीद और सारी व्यवस्था हरियाणा का एक श्रद्धालु कर रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed