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आबकारी आयुक्त से छिना शीरा बिक्री की अनुमति का अधिकार

Wed, 06 Jul 2016 09:42 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 06 Jul 2016 09:42 AM IST
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change in uttarakhand excise policy
- फोटो : concept photo

नियम-कानून और व्यवस्था का मखौल उड़ाते हुए आबकारी एक्ट के तहत शीरा नीति में बड़ा संशोधन कर दिया गया।

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इसके लिए कैबिनेट की बैठक को रास्ता बनाया गया और महज एक प्रस्ताव पास कराकर मंशा पूरी कर ली गई। आठ जून को हुई कैबिनेट की बैठक में आबकारी आयुक्त से शीरे की खुले बाजार में होने वाली बिक्री की अनुमति का अधिकार छीनने संबंधी प्रस्ताव पास कराया गया, जबकि इस प्रकार का संशोधन कैबिनेट की बैठक मात्र से होना संभव नहीं है।

बुधवार को इस संबंध में अधिकृत आदेश भी जारी किया जाएगा। खबर यह भी है कि इसके पीछे शराब माफिया का हाथ है। नियंत्रण समाप्त होने से कालाबाजारी तो बढ़ेगी ही अधिकाधिक शीरे के बेरोकटोक उठान में भी आसानी होगी। राज्य की चीनी मिलों में उत्पादित शीरे की बिक्री के लिए शीरा नीति लागू है। राज्य गठन के बाद से इसी नीति के तहत चीनी मिलों में उत्पादित शीरे का निस्तारण किया जाता है।
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इसके तहत 10 फीसदी शीरा पशु आहार बनाने वाली कंपनियों को और 20 फीसदी शीरा देसी शराब बनाने के लिए आरक्षित होता है। इसके अलावा शेष शीरे को शीरा नियंत्रक (आबकारी आयुक्त) की अनुमति से स्वतंत्र बिक्री के लिए रखा जाता है। इसकी लिखित सूचना प्रत्येक माह आबकारी आयुक्त को भेजी जाती है कि कितना शीरा किसे और कहां बेचा गया।
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यह व्यवस्था शीरे की बिक्री पर आयुक्त स्तर से मॉनिटरिंग के मकसद से की गई थी। मगर अचानक इस अधिकार को बीती आठ जून को हुई कैबिनेट की बैठक में विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह द्वारा एक प्रस्ताव पेश करके आबकारी आयुक्त से छीन लिया गया। यानी स्वतंत्र बिक्री के लिए आरक्षित शीरे की खरीद और उठान के लिए प्रदेश की डिस्टलरियों को आयुक्त से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

बुधवार को इसका आदेश जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि शीरा बेहद संवेदनशील वस्तु है, जिसके प्रत्येक लेनदेन पर निगरानी बेहद आवश्यक है। सूत्रों की मानें तो यह कदम शराब माफिया के दबाव में उठाया गया है, जिससे देसी शराब समेत अन्य केमिकल इंडस्ट्री में इसके इस्तेमाल में ज्यादा रोकटोक न हो सके।

ऐसे है गड़बड़ी की संभावना
उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम के सेक्शन 22 में शीरा नीति बनाए जाने की बात कही गई है, जबकि इसी एक्ट की धारा 7-ए में आबकारी आयुक्त को शीरा बिक्री के नियंत्रण संबंधी अधिकार प्राप्त हैं। सूत्रों की मानें तो चीनी मिल में गन्ने की पेराई के वक्त शीरे की चोरी की संभावना सर्वाधिक होती है।

गुपचुप तरीके से शीरा बेचकर इसमें पानी मिला दिया जाता है, जिससे माप पूरी नजर आती है। अगर शीरे को टैंक में मापा जाए तो भी झाग की वजह से माप सही नहीं आ सकती है। इस बात की पूरी संभावना है कि नियंत्रण समाप्त किए जाने से चोरी किए गए शीरे का सौदा डिस्टलरियों से होगा, क्योंकि वहां मनमाफिक कीमत मिलेगी। इसके अलावा इस प्रकार तैयार होने वाली शराब भी अवैध होगी, जिससे राजस्व की हानि भी तय है।

नियम-कानूनों का उड़ा मखौल 
शीरे की बिक्री को उदार करने के अधिकारियों का तर्क अपनी जगह है, मगर यह कवायद सवालों के घेरे में है। प्रदेश में शीरा नीति का निर्धारण उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम-1964 (उत्तराखंड सरकार में यथा अनुकूलित एवं उपांतरित) की धारा-22 के अंतर्गत किया जाता है।

नियमानुसार एक्ट में कोई भी संशोधन तभी संभव है, जब कैबिनेट से प्रस्ताव पास करके उसे विधानसभा में रखकर पास किया जाए। इसके अतिरिक्त आवश्यकता पड़ने पर अध्यादेश जारी करके राज्यपाल की अनुमति से भी ऐसा किया जा सकता है, मगर इस दशा में भी 42 दिन के भीतर विधानसभा से पास करना अनिवार्य है। मगर यहां केवल कैबिनेट में प्रस्ताव पास करके संशोधन किया गया, जिससे नियमों का मखौल उड़ रहा है।


मौजूदा व्यवस्था से शीरे की बिक्री संबंधी फाइलें काफी लंबित रहती हैं। साथ ही नीलामी की अनुमति समय से न मिलने से भी दिक्कत हो रही थी। यह सब देखते हुए इस व्यवस्था को उदार किया गया है। कैबिनेट में प्रस्ताव पास हो चुका है। बुधवार को इस संबंध में अधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा। इससे एक्ट में कोई बाधा उत्पन्न होती नजर नहीं आ रही है।
- डॉ. रणवीर सिंह, अपर मुख्य सचिव

Published By : Nirmala Suyal

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