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Bridge Collapse: 17 साल में तीसरी बार टूटा गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब को जोड़ने वाला पुल, हर बार बढ़ी परेशानी

Thu, 06 Mar 2025 02:30 AM IST
अलका त्यागी प्रदीप भंडारी, संवाद न्यूज एजेंसी, ज्योतिर्मठ
प्रदीप भंडारी, संवाद न्यूज एजेंसी, ज्योतिर्मठ Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 06 Mar 2025 02:30 AM IST
सार

जब अचानक गोविंदघाट में बना पुल भूस्खलन की जद में आने से धराशायी हो गया तो यहां पर पिछले सालों में आई आपदाओं का मंजर भी आंखों के सामने आ गया।

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Chamoli News Bridge connecting Govindghat to Hemkund Sahib collapsed for the third time in 17 years
गोविंदघाट में पुल टूटा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोविंदघाट क्षेत्र आपदा की दृष्टि से काफी संवेदनशील रहा है। पिछले 17 सालों में यहां पर अलकनंदा नदी पर बने पुल तीन बार टूट चुके हैं। इससे जहां एक तरफ हेमकुंड साहिब जाने वाले यात्रियों और फूलों की घाटी जाने वाले पर्यटकों को परेशानी उठानी पड़ती है वहीं पुलना के ग्रामीणों के लिए भी यह बड़ी समस्या बन जाता है।

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बुधवार को जब अचानक गोविंदघाट में बना पुल भूस्खलन की जद में आने से धराशायी हो गया तो यहां पर पिछले सालों में आई आपदाओं का मंजर भी आंखों के सामने आ गया। पिछले 17-18 सालों में आपदा से यहां बड़ी तबाही हुई हैं। बार-बार पुल टूटने से हेमकुंड साहिब जाने वाले यात्री खासे परेशान रहे हैं। 2013 की आपदा हो या उससे पहले 2007 में आई आपदा, सभी ने इस क्षेत्र को काफी जख्म दिए हैं। जिनसे उबरने में काफी समय लग जाता है। हर बार जब भी पुल टूटते हैं तो पुलना के ग्रामीणों का जीवन गांव तक ही सीमित रह जाता है।
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गोविंदघाट में कब-कब टूटे पुल

  • 2007 में हेमकुंड साहिब जाने वाला झूला पुल टूटा था।
  • 2008 में यहां पर वाहन पुल बना और वह 2013 की आपदा में टूट गया।
  • 2013 की आपदा के बाद यहां पर घोड़ा पड़ाव पर अस्थायी छोटा पुल बनाया गया। जबकि गुरुद्वारा के पास भी अस्थायी झूला पुल बना था।
  • 2015 में यहां पर 105 मीटर लंबा सस्पेंशन ब्रिज बनाया गया, जो बुधवार को ध्वस्त हो गया।

पुलना में अप्रैल में दो शादियां, एक डिलीवरी

ज्योतिर्मठ। पुलना गांव में वर्तमान में 101 परिवार निवास करते हैं। ग्रामीण इसी पुल से आवाजाही करते थे। पुल टूटने से ग्रामीणों के सामने आवाजाही का संकट गहरा गया है। पुलना वर्ष 2013 की आपदा से प्रभावित गांव है। उस समय लक्ष्मण गंगा में बाढ़ आने से गांव तबाह हो गया था।

ग्रामीण आपदा से उबरे ही थे कि अब पुल टूटने से आवाजाही का संकट खड़ा हो गया है। दैनिक जरूरतों को पूरा करना के साथ ही गांव में शादी विवाह को संपन्न कराना भी उनके बड़ी चुनौती रहेगा। अप्रैल में पुलना गांव में दो शादियां होनी हैं, जबकि एक महिला की डिलीवरी भी होनी है। ऐसे में अब लोग इसको लेकर चिंतित हो गए हैं।

पुलना के आशीष चौहान ने बताया कि पुल टूटने से गांव का संपर्क बाकी क्षेत्रों से टूट गया है। लोग कैसे आवाजाही करेंगे, जरूरी कामों के लिए किस तरह से नदी के दूसरी तरफ जाएंगे यह सबसे बड़ी चिंता है। अप्रैल में गांव में दो शादियां हैं। एक युवक की शादी है जिसमें बरात बाहर जाएगी, जबकि एक युवती की शादी है जिसमें बाहर से बरात गांव में आएगी। ऐसे में यदि समय पर कोई व्यवस्था नहीं हो पाती है तो शादियों को संपन्न कराने में भारी दिक्कतें आ जाएंगी। वहीं गांव की आशा सुपरवाइजर हेमंती देवी ने बताया कि पुलना में अप्रैल माह में एक गर्भवती महिला की डिलीवरी होनी है।

ग्रामीणों के वाहन भी फंसे

पुल टूटने से पुलना गांव के ग्रामीणों के वाहन भी फंस गए हैं। जिनके वाहन गोविंदघाट की तरफ थे वे यहीं फंस गए हैं जबकि कई ग्रामीणों के दोपहिया और चार पहिया वाहन पुलना की तरफ थे। पुल ध्वस्त होने से सभी तरह के वाहन फंस गए हैं।

मवेशियों के लिए बनी पुलिया से आवाजाही

पुलना के ग्रामीणों ने गोविंदघाट के पास नदी पर मवेशियों की आवाजाही के लिए कच्ची पुलिया बना रखी है। इससे वे अक्सर मवेशियों को इधर-उधर लाने ले जाने का काम करते हैं। अब मुख्य पुल के टूटने से लोग इसी पुलिया से आवाजाही कर रहे हैं।

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