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Dehradun News: उत्तराखंड में प्रमाणपत्र होंगे द्विभाषी, जमीनों की होगी जिओ फेंसिंग
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देहरादून। उत्तराखंड में बनने वाले प्रमाणपत्र अब दो भाषाओं में होंगे। यहां से विदेश जाने वाले युवाओं को हिंदी में बने प्रमाणपत्रों को लेकर होने वाली परेशानी को देखते हुए इसकी कवायद शुरू हो गई है। ऑनलाइन बनने वाले प्रमाणपत्रों के लिए दफ्तरों की दौड़ पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। वहीं, जमीनों की जिओ फेंसिंग कराई जाएगी, जिससे रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा रुक जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने इस पर काम शुरू कर दिया है।
सचिव आईटी डॉ. पंकज पांडेय ने बताया कि उत्तराखंड से जो युवा दूसरे देशों में जाते हैं, वहां हिंदी में बने कई प्रमाण पत्रों की वजह से उन्हें दिक्कतें पेश आती हैं। लिहाजा, सभी प्रमाणपत्रों को द्विभाषी बनाया जा रहा है। यह प्रमाणपत्र हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी होंगे। वहीं, तमाम प्रमाणपत्र ऐसे हैं, जिनके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया होती है। इनको बनवाने से लेकर जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन की जा रही है। दफ्तरों की दौड़ खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए प्रमाणपत्र बनने के बाद सीधे डिजिलॉकर में आ जाएगा।
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जमीनों की पहचान होगी सैटेलाइट से
डॉ. पंकज पांडेय ने बताया कि आने वाले समय में जब आप जमीन खरीदोगे तो उसकी असल पहचान सीधे सैटेलाइट से हो सकेगी। इसके लिए जिओ फेंसिंग की कवायद शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि इससे हर जमीन की एक डिजिटल सैटेलाइट पहचान हो जाएगी। जब रजिस्ट्री होगी तो उसमें आसानी से उसकी पहचान हो सकेगी। एक ही जमीन कई बार बेचने जैसे अपराधों पर लगाम लग जाएगी।
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सचिव आईटी डॉ. पंकज पांडेय ने बताया कि उत्तराखंड से जो युवा दूसरे देशों में जाते हैं, वहां हिंदी में बने कई प्रमाण पत्रों की वजह से उन्हें दिक्कतें पेश आती हैं। लिहाजा, सभी प्रमाणपत्रों को द्विभाषी बनाया जा रहा है। यह प्रमाणपत्र हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी होंगे। वहीं, तमाम प्रमाणपत्र ऐसे हैं, जिनके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया होती है। इनको बनवाने से लेकर जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन की जा रही है। दफ्तरों की दौड़ खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए प्रमाणपत्र बनने के बाद सीधे डिजिलॉकर में आ जाएगा।
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जमीनों की पहचान होगी सैटेलाइट से
डॉ. पंकज पांडेय ने बताया कि आने वाले समय में जब आप जमीन खरीदोगे तो उसकी असल पहचान सीधे सैटेलाइट से हो सकेगी। इसके लिए जिओ फेंसिंग की कवायद शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि इससे हर जमीन की एक डिजिटल सैटेलाइट पहचान हो जाएगी। जब रजिस्ट्री होगी तो उसमें आसानी से उसकी पहचान हो सकेगी। एक ही जमीन कई बार बेचने जैसे अपराधों पर लगाम लग जाएगी।
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