उत्तराखंड की सेहत से खेल रहा केंद्र, लटकाया योजनाओं का पैसा
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राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की राह में केंद्र ने अड़ंगा लगा रखा है। स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने के लिए तीन योजनाओं में मिलने वाली 12 सौ करोड़ से अधिक की धनराशि को राज्य की मजबूत पैरवी के बाद भी केंद्र ने लटका रखा है।
विभागीय अधिकारियों के कई बार संबंधित परियोजनाओं के लिए दस्तावेज देने के बाद भी स्वीकृत परियोजनाओं में धनराशि जारी नहीं हो रही है। सबसे अहम साढ़े सात सौ करोड़ की हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट परियोजना है। इसके अलावा अल्मोड़ा में मेडिकल कालेज के लिए सवा सौ करोड़ और स्वास्थ्य मिशन में 405 करोड़ की धनराशि केंद्र से मिलनी है।
सैद्धांतिक सहमति मिलने के डेढ़ वर्ष बाद भी हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई है। विश्व बैंक प्रदेश को धनराशि देने को तैयार है, लेकिन केंद्र ने इसमें पेच डाल दिया है।
उत्तराखंड को विशेष दर्जे में लाभ देने को तैयार नहीं
केंद्र उत्तराखंड को विशेष दर्जे में लाभ देने को तैयार नहीं है। साढ़े सात सौ करोड़ के ऋण का ब्याज राज्यों को भरने के लिए बोला जा रहा है, जबकि राज्य 90:10 के अनुपात में धनराशि चाहता है। अब केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ इकोनामिक अफेयर) में अटक गया है, जबकि सीएम हरीश रावत भी इसके लिए पैरवी कर चुके हैं।
यह मामला अब केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने जा सकता है। इसके अलावा अल्मोड़ा मेडिकल कालेज के निर्माण के लिए केंद्र से 111 करोड़ रुपये चिकित्सा शिक्षा विभाग को मिलने हैं, लेकिन कॉलेज पर राज्य अपने बजट से अधिक खर्च कर चुका है, जबकि केंद्र ने महज 11 करोड़ दिए हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 2 जून को सैद्धांतिक सहमति मिल गई है, लेकिन उसके बाद भी बजट जारी नहीं किया है।
हेल्थ सिस्टम पर टिकी है आस
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं स्वास्थ्य मिशन पर टिकी है। इसके अलावा आधारभूत ढांचा सुधारने के लिए हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट बेहद अहम है। जिन योजनाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वीकृति नहीं मिल पाई, उनको विश्व बैंक में शामिल किया गया है।
पीपीपी में 104 हेल्थ टेली सर्विसेज, मोबाइल हेल्थ वैन, सर्जिकल कैंप आदि योजनाएं शामिल की गई हैं। इसके साथ ही आधारभूत ढांचा विकास, नए लाजिस्टक और साफ्टवेयर प्रणाली का विकास शामिल है।अस्पतालों में ढांचागत सुविधाएं मजबूत करने के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों को एकीकृत कर स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाया जाना है।
इनका है कहना
योजनाएं केंद्र के स्तर से रुकी हुई हैं। हमारे यहां से अधिकारी तमाम औपचारिकताएं पूरी कर चुके हैं। अगर समय से बजट मिले तो प्रदेश में आधारभूत ढांचा विकसित करने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा सकता है।
-ओम प्रकाश, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य