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आखिर क्यों मुझसे बात नहीं करता कोईः हरीश
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 06 Nov 2013 12:37 PM IST
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उत्तराखंड कांग्रेस के एक धड़े के नेता केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और हरिद्वार सांसद हरीश रावत इस समय आहत है।
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तमाम नेता करते हैं दिल्ली का रुख
अंदरखाने रावत की शिकायत है कि उत्तराखंड कांग्रेस के तमाम नेता दिल्ली की ओर रुख करते हैं पर उनसे बात करने की जहमत तक कोई नहीं उठाता।
यह तब है जबकि रावत केपास जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण मंत्रालय है और उत्तराखंड के लिहाज से ये खासा उर्वर मंत्रालय माने जा सकते हैं।
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रावत भले ही केंद्र में मंत्री हैं पर स्थानीय सांसद होने के नाते प्रदेश की कांग्रेस की राजनीति में भी उनका सीधा दखल है। ऐसे में रावत के समर्थक तक खुद को प्रदेश की राजनीति में एक छोर पर पाते हैं। उत्तराखंड के मुख्मंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष बनने और अपने लोगों को लाल बत्ती दिलाने में रावत का नाम सुर्खियों में रहा है।
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ऐसे में रावत से बात करने का मतलब प्रदेश की राजनीति में एक हलचल पैदा करना भी रहा है। ऐसे में रावत प्रदेश की राजनीति के चमकते सितारे नजर आते हैं पर मंत्रालय के हिसाब से उत्तराखंड उनके लिए अछूता ही रह जाता है।
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रावत को परेशान कर रही यह वजह
हाल यह रहा कि बाढ़ नियंत्रण के काम हो या केंद्रीय परियोजनाओं के लिए प्रदेश में जमीन का मसला। यही वजह रावत को परेशान भी कर रही है। अंदरखाने रावत यह महसूस भी करने लगे हैं कि मंत्रालय का उपयोग जिस तरह से उत्तराखंड में हो सकता था वह नहीं हो पा रहा है।
आपदा के बाद प्रदेश में नदियों की फ्लड जोन मैपिंग एक बेहद महत्वपूर्ण मामला है। फ्लड जोन मैपिंग हो जाती है तो नदियों के किनारे निर्माण की हदबंदी भी स्पष्ट हो जाएगी।
यह भी तय किया जा सकेगा कि नदियों से कितनी दूरी बनाकर निर्माण कराया जा सकता है। यही हाल बाढ़ नियंत्रण के कामों का है। नदियों में बाढ़ नियंत्रण के काम अगर समय से पूरे हो जाते हैं तो आने वाले समय में बरसात के बाद नदियों के उफान से नुकसान पर रोक लगाई जा सकेगी।
सॉफ्ट कॉर्नर का पूरा उपयोग
इन दोनों मामलों में ही जल संसाधन मंत्रालय के सॉफ्ट कॉर्नर का पूरा उपयोग किया जा सकता था। पर हाल यह रहा कि भरी प्रेस वार्ता में एक बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य ने यह गिना दिया था कि बाढ़ नियंत्रण के कितने काम अटके पड़े हैं।
उधर रावत का कहना था कि प्रस्ताव मिले ही नहीं। प्रदेश केमंत्रियों और नेताओं के दिल्ली दौरे आम बात है। पर शायद ही कभी ऐसा होता हो कि हरीश रावत से इन लोगों की मुलाकात की खबर आती हो।
सीएम ने की कई बार सहयोग लेने की बात
ऐसा नहीं है कि रावत से कभी बात ही न की गई हो। प्रदेश का नेतृत्व विशेष औद्योगिक पैकेज की अवधि बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री से मिला था तो जोर शोर से कहा गया कि रावत भी साथ होंगे। इसके बाद अन्य कई मौकों पर भी मुख्यमंत्री ने कहा कि रावत का पूरा सहयोग लिया जाएगा।
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