NH 74 घोटाले पर उत्तराखंड सीएम का एलान, CBI करेगी घोटाले की जांच
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उत्तराखंड की नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में भूचाल मचाने वाले एनएच 74 घोटाले की जांच अब सीबीआई करेगी।
बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा सत्र के बाद यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि एनएच 74 घोटाले की जांच अब सीबीआई द्वारा करवाई जाएगी। इसके साथ ही किसानों की ऋण माफी पर सीएम रावत ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि किसानों का ऋण माफ किया जा सके।
वहीं एनएच 74 मामले में एसआईटी की कार्रवाई जारी है। बुधवार को टीम ने करीब 10 से ज्यादा जगहों पर छापा मारा। सूत्रों के मुताबिक टीम ने देहरादून, बाजपुर, काशीपुर, सितारगंज और कालाढूंगी में छापेमारी की कार्रवाई कर कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।
घोटाले का पर्दाफाश करने वाले जांच अधिकारी का तबादला कर दिया
बता दें कि हाल ही में NH-74 घोटाले का पर्दाफाश करने वाले जांच अधिकारी का तबादला कर दिया गया। वहीं अब पीएम मोदी के एक मंत्री पर इस घोटाले का खुलासा न हो, इसलिए ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा है।
कुछ माह पहले ही एनएच-74 में 300 करोड़ से अधिक का घोटला सामने आया था। जिसमें जांच अधिकारी डी सेंथिल पांडियन का तबादला कर दिया गया। बताया जाता है कि पांडियन बेहद ही ईमानदार और साफ छवि के अधिकारी रहे हैं। बावजूद इसके उनको इस जांच से अलग कर देना कहीं न कहीं सरकार पर सवाल भी खड़े कर रहा है।
प्रदेश की त्रिवेंद्र सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की संस्तुत की थी। लेकिन केंद्रीय मंत्री गड़करी ने राज्य सरकार को जांच वापस लेने के लिए धमकी भरा पत्र लिखकर घोटालेबाजों को बचाने का प्रयास किया था।
सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एनएच-74 घोटाले का पता चला था। पूर्व सीएम हरीश रावत ने इसके लिए कुमांऊ कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की थी। जांच में 300 करोड़ से अधिक का घपला पाया गया है। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इसकी सीबीआई जांच की संस्तुत की, लेकिन केंद्रीय सड़क एवं भूतल परिवहन गड़करी ने आरोपियों को बचाने के लिए अपने अधिकारों का गलत प्रयोग करते हुए राज्य सरकार पर दबाब बनाया है। पीएम मोदी ने कहा कि न खाऊंगा न खाने दूंगा का नारा दिया था, लेकिन एक मंत्री के आगे वह भी नतमस्तक हो गए हैं। ऐसा में उन्हें देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।