स्टिंग मामले में हरीश रावत को CBI ने फिर से भेजा समन
सीबीआई ने कथित स्टिंग ऑपरेशन के सिलसिले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत से 26 तारीख को अपने यहां हाजिर होने को कहा है।
पिछले सात महीने में यह दूसरी बार है जब रावत को पीई (प्रिलिमनरी इनक्वायरी) दर्ज होने के आधार पर सीबीआई ने बुलाया है। इससे पहले वह सीबीआई के सामने 24 मई को हाजिर हुए थे। उस समय उनसे लगभग पांच घंटे तक पूछताछ हुई थी।
रावत को दूसरी बार शायद इसलिए बुलाया गया है क्योंकि उन्होंने पहली पूछताछ के दौरान कई मुद्दों पर पूरी जानकारी नहीं दी थी।
पीई पर किसी सीएम को बुलाए जाने का अनूठा मामला
गौरतलब है कि सीबीआई ने 29 अप्रैल के एक कथित स्टिंग ऑपरेशन के सिलसिले में रावत के खिलाफ पीई दर्ज किया था। इसमें रावत को सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए कांग्रेस के विधायकों को घूस की पेशकश करते हुए दिखाया गया है। किसी वर्तमान मुख्यमंत्री को पीई के आधार सीबीआई की ओर से बुलाए जाने का यह मामला अपने आप में नायाब हो सकता है।
पीई पहला कदम है, जिसके तहत एजेंसी किसी शख्स के खिलाफ मिली शिकायत की जांच करती है। पीई के दौरान एजेंसी किसी शख्स को जांच में शामिल होने का आग्रह करती है। उसे समन नहीं करती और न ही तलाशी लेती है और न ही गिरफ्तारी करती है।
क्या है स्टिंग में?
अगर तथ्यों की पड़ताल के बाद आगे और जांच की जरूरत महसूस की जाती है तो एफआईआर दर्ज की जाती है नहीं तो पीई बंद कर दी जाती है।
सीबीआई की जांच एक चैनल के मालिक से उनके रिश्तों पर केंद्रित है। जिसने आरोप लगाया था कि हरीश रावत ने एक बागी विधायक और अपनी पुरानी कैबिनेट के एक मंत्री को रिश्वत की पेशकश की थी। उन पर किए गए कथित स्टिंग में भी यही दावा किया गया है।