जहरीली घास खाने से दर्जन भर से ज्यादा मवेशी मरे
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उत्तरकाशी के डोडीताल के निकट मांझी एवं मोरापड़ा की छानियों में जहरीली वनस्पति के सेवन से एक दर्जन से ज्यादा मवेशियों के मरने की सूचना है। उधर, बेलख बुग्याल की छानियों में भी कुछेक पशुओं के मरने की बात कही जा रही है। इस पर पशुपालन विभाग ने ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए टीम रवाना करने का निर्णय लिया है।
अगोड़ा के प्रधान चंद्रलाल, संजय पंवार आदि ने बताया कि घास एवं चारा पत्ती के बीच खरसू के बीज खाने से एक दर्जन मवेशी मर गए हैं।
मांझी में जगदीश पंवार, हिकमत सिंह, जयेंद्र सिंह, सरत सिंह रावत, गजेंद्र सिंह, जयवीर आदि की गाय, विजेंद्री देवी, प्रथम सिंह के बैल तथा प्रकाश सिंह का एक बैल और एक घोड़े के बच्चे की मौत हो चुकी है।
मवेशी के मरने से ग्रामीणों में घबराहट
उधर, मोरापड़ा की छानियों में भी हरदेव सिंह समेत अन्य ग्रामीणों के पशु जहरीली वनस्पति खाने से मर चुके हैं। कठूड़ क्षेत्र के बेलख बुग्याल में भी ठांडी गांव के इंद्र सिंह की गाय तथा सोबत सिंह के बैल की मौत हुई है।
मवेशियों के मरने से ग्रामीणों में घबराहट है। गौरतलब है कि पहाड़ में मवेशी स्थानीय लोगों की बड़ी जरूरत हैं। छोटी जोत औक पहाड़ में खेतों की बनावट के चलते जुताई का अधिकांश काम भी इनसे ही लिया जाता है।
डॉक्टर का कहना
जागरूकता से ही इससे बचा जा सकता है। बृहस्पतिवार को भंकोली के पशु चिकित्सक डॉ. अंकित कुमार के नेतृत्व में टीम को मांझी भेजा जा रहा है। इसके बाद ही मरने वाले पशुओं की वास्तविक संख्या और मौत के कारणों का पता चल पाएगा।
0-डॉ. हिमांशु पांडेय, उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी उत्तरकाशी।