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तबादले के लिए भटक रहा कैंसर पीड़ित शिक्षक

Mon, 04 Aug 2014 05:01 PM IST
Updated Mon, 04 Aug 2014 05:01 PM IST
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cancer sufferer teacher want transfer in uttarakhand

कैंसर पीड़ित 51 वर्षीय संपूर्णानंद को रोज राजकीय इंटर कॉलेज बरसूड़ी के लिए एक किलोमीटर खड़ी चढ़ाई चढ़नी होती है। रुद्रप्रयाग जिले के इस अति दुर्गम स्कूल में संपूर्णानंद बहुगुणा सहायक अध्यापक हैं। अगस्त 2013 में उन्हें कैंसर हो गया।

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मूलत: श्रीनगर निवासी बहुगुणा को अब हर महीने उपचार के लिए दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जाना पड़ता है।

उनकी स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि डॉक्टरों ने अवशिष्ट त्याग के लिए उनके पेट में थैली लगा दी है। बहुगुणा पेट में लगी इस थैली के साथ 11 माह से शिक्षा विभाग के अफसरों और मंत्री के समक्ष गुहार लगा चुके हैं।
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लेकिन चहेतों को दुर्गम से सुगम में लाने में ‘व्यस्त’ अफसरों को न इस शिक्षक की हालत नजर आ रही है, न अति दुर्गम स्कूल में दी गई 13 साल की सेवा।

कैसे छोड़ दूं नौकरी?

cancer sufferer teacher want transfer in uttarakhand

अमर उजाला से बातचीत के दौरान रूंधे गले से बहुगुणा ने बताया कि उनकी तीन बेटियां हैं। परिवार श्रीनगर में रहता है। बड़ी बेटी बीएड कर रही है, दूसरी बीएससी में है जबकि सबसे छोटी अभी 11वीं में पढ़ रही है।

बहुगुणा कहते हैं तीनों बेटियों के भविष्य का सवाल उन्हें नौकरी छोड़ने नहीं देता। कहते हैं रिटायरमेंट के लिए नौ साल बचे हैं, बच्चियों के लिए दर्द सहकर काट लेंगे।

कब कहां किया आवेदन
बहुगुणा अब तक तीन बार तबादले के लिए आवेदन कर चुके हैं। सबसे पहले उन्होंने नवंबर 2013 में संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को आवेदन किया, लेकिन यह कहकर लौटा दिए गए कि अब तबादले नहीं होंगे।

इसके बाद नवंबर में ही शिक्षा निदेशालय को दिए आवेदन में अपनी दिक्कत बताई, लेकिन अफसरों ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद फरवरी 2014 में बहुगुणा ने शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी को तबादले के लिए प्रार्थनापत्र दिया।

पहुंच वालों के लिए नहीं नियम

cancer sufferer teacher want transfer in uttarakhand

अति दुर्गम स्कूलों में 15-20 साल से तैनात बिना पहुंच वाले शिक्षकों की सुध लेने के लिए कोई तैयार नहीं।

जबकि चहेतों के लिए कायदे ताक पर रखे जा रहे हैं। अनुरोध के आधार पर शिक्षकों के तबादले दिसंबर 2013 तक ही होने थे, लेकिन अपनों को फिट करने के लिए यह प्रक्रिया 15 फरवरी 2014 तक बढ़ाई जाती रही।

इस प्रक्रिया में 1399 शिक्षकों को सुगम स्कूलों में पहुंचा दिया गया। इसके अलावा 86 शिक्षकों के अंतरजनपदीय और 281 के अंतरमंडलीय तबादले किए गए।

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प्रमोशन में भी दिया सुगम

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शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति, पदोन्नति एवं स्थानांतरण नियमावली में भी विभाग ने चहेतों के लिए कई बार संशोधन किया।

वर्ष 2013-14 में 3521 से अधिक शिक्षकों के तबादले किए गए, लेकिन अफसरों और नेताओं के खास शिक्षकों को सुगम स्कूल दिए गए।

रुद्रप्रयाग में जहां मैं रहता हूं, वहां इलाज की बेहतर सुविधा नहीं है। हर महीने दिल्ली जाना पड़ता है। देहरादून में ट्रांसफर हो जाता तो इलाज, आवागमन की सुविधा मिल जाती। इसके सिवा और कुछ नहीं चाहिए। इस स्कूल को 13 साल दिए हैं। यहीं, ये सुविधाएं होती तो शायद मैं तबादला मांगता भी नहीं।
- संपूर्णानंद बहुगुणा, पीड़ित शिक्षक

कैंसर पीड़ित शिक्षक को हर हाल में सुगम स्कूल में लाया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि किन वजहों से अब तक इस शिक्षक को सुगम स्कूल में नहीं लाया जा सका।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री

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