तैरना नहीं आता था पर चार को डूबता देख कूदा भंवर में
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सराड़ी खड्ड में एकाएक पानी का जल स्तर बढ़ गया था। देव दर्शन करने गए 15-20 लोगों में से कई खड्ड को पार कर चुके थे। खड्ड के दूसरी ओर धन्ना, उसकी पत्नी गुन्नी देवी, गोद में पांच वर्षीय बेटा और गुन्नी की बड़ी बहन कम्मो बचे थे।
खड्ड को पार करने के लिए उन्होंने किसी तरह हिम्मत जुटाई। तीनों एक दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ने लगे। पानी भी धीरे-धीरे कमर तक पहुंच चुका था।
करीब 15 मीटर चौड़े खड्ड को पार करते हुए गुन्नी देवी के कदम लड़खड़ाने लगे। यह देख धन्ना और कम्मो के भी डर गए। सभी को पानी का तेज बहाव धकेलने लगा।
यह नजारा दूसरे छोर पर खड़े बेबस ग्रामीणों के साथ ही 25 वर्षीय चमन पुत्र केसर सिंह भी देख रहा था। वह गांव में ही खेतीबाड़ी और ध्याड़ी मजदूरी करता है। चार जिंदगियों को बीच भंवर में डूबता देख उससे रहा नहीं गया।
डूबती महिला के हाथों से निकाल लाया बच्चे को
उसने हिम्मत जुटाई और आगे बढ़ गया। तेज बहाव से उसके भी कदम लड़खड़ाए, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वह तैरना भी नहीं जानता था। वह किसी तरह बीच खड्ड में पहुंच गया। इससे पहले की वह कुछ समझ पाता खड्ड ने रौद्र रूप धारण कर लिया।
तेज बहाव की चपेट में आने से बीच भंवर में फंसे तीन लोग बहने लगे। चमन ने लड़खड़ाती गुन्नी देवी के हाथों से बेटे को अपनी गोद में खींच लिया और धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए उफनाए खाले के पार ले आया।
तीन को न बचा पाने का अफसोस
जब तक वह दुबारा प्रयास करता काल बना सराड़ी खड्ड एक एक कर धन्ना, उसकी पत्नी गुन्नी देवी और कम्मो को लील गया। बेबस ग्रामीणों के साथ साहसी युवक चमन की आंखों के सामने तीनों जिंदगियां एक एक कर ओझल हो गईं। चमन का कहना है कि ‘हिम्मत नहीं दिखाता तो क्या करता, मगर सारी जिंदगी तीन और लोगों को नहीं बचा पाने का गम सालता रहेगा।’