अवैध ऑफिसों में काम कर रहे उत्तराखंड के अफसर
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सरकारी अफसरों का अपने आवासों या मनचाहे स्थान पर कैंप आफिस खोलना पूरी तरह अवैधानिक हैं क्योंकि मैन्युअल आफ गवर्नमेंट आर्डर्स (एमजीओ) में इन्हें खोले जाने का कोई प्रावधान नहीं है। बावजूद इसके उत्तराखंड में कई अफसर ऐसे हैं जो अवैध ऑफिसों से काम कर रहे हैं।
उत्तराखंड के ही नहीं, उत्तर प्रदेश के एमजीओ में भी इस संबंध में कभी कोई आदेश नहीं हुआ है। वरिष्ठ अधिकारियों ने कैंप आफिस खोलने को अवैध और फिजूलखर्ची बताया।
सूत्रों का कहना है कि पहाड़ पर जाने से बचने और निहित स्वार्थों की सिद्धि के लिए कुछ अफसर राजधानी में कैंप आफिस बनाए हुए हैं।
अंग्रेजों के जमाने में न्यायिक, प्रशासनिक और पुलिस के बड़े अफसरों को यह अधिकार दिया गया था कि वे समय, काल व परिस्थिति के मुताबिक कहीं भी आदेश जारी कर सकते हैं। यह माना जाता था कि इनका काम 24 घंटे का होता है लेकिन घरों में कैंप आफिस खोल लेने का नियम नहीं था।
आदेश रहे बेअसर
आजाद भारत में इन मनचाहे कैंप आफिसों के खिलाफ आदेश भी किए गए, लेकिन बेअसर रहे। बाद में अन्य विभागों के अफसरों ने भी अपनी सुविधानुसार कैंप आफिस खोलने शुरू कर दिए। उनका तर्क था कि गोपनीय कार्य वे कैंप आफिस में निपटाते हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ कैंप आफिसों के स्वार्थ सिद्धि का केंद्र बन जाने की शिकायतें भी सामने आईं हैं।
अंग्रेजों के समय में शुरू हुए थे कैंप ऑफिस
ब्रिटिश शासन काल में अंग्रेज अफसर प्रशासनिक कार्यों के संबंध में घोड़ों पर सवार हो दूर-दूर तक जाते थे। उस समय आने-जाने में कई दिन लगते थे। इसलिए उन्हें गांवों में कैंप लगाकर ठहरना पड़ता था। इसी कैंप में वे अस्थायी आफिस बना लेते थे। इन्हें कैंप आफिस कहा जाने लगा। आजादी के बाद अफसरों ने अपनी सुविधानुसार घरों में कैंप आफिस खोल दिया।
चाहिए लिखित अनुमति
इस बारे में कार्मिक विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि अगर किसी अफसर को जरूरी कारण से घर पर कैंप आफिस बनाना है तो उसे सरकार से लिखित अनुमति लेनी चाहिए।
इनका है कहना
कोई भी अफसर आवास में कैंप आफिस नहीं बना सकता। यह अवैधानिक है। इस पर कार्रवाई और भर्त्सना होनी चाहिए। कैंप आफिस बनाना जनविरोधी, सरकारी धन का अपव्यय और अनुचित है। एमजीओ में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। आवास रहने के लिए होता है काम के लिए करोड़ों रुपए की लागत से बना आफिस होता है। गोपनीय काम अफसर अपने चैंबर में भी निपटा सकते हैं।
-आरएस टोलिया, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन।