{"_id":"a4adecd6f4cda6f55f7198593dd6d595","slug":"cag-report-on-uttarakhand-financial-year-2014-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैग ने पकड़ी कई उत्तराखंड सरकार की कलई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैग ने पकड़ी कई उत्तराखंड सरकार की कलई
ब्यूरो / अमर उजाला, गैरसैंण
Updated Wed, 04 Nov 2015 09:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के 2014 के वित्तीय वर्ष के लिए कैग की रिपोर्ट ने कई गड़बड़ियां पकड़ी। निर्मल भारत अभियान पर सवाल उठाए, 13 जिलों में से प्रदेश की छह जिलों की जेलों को पूरी तरह से अक्रियाशील है।
विज्ञापन
हरिद्वार नगर निगम ने 2.16 करोड़ रुपए के राजस्व की वसूली नहीं की। 10 लाख के सौर उपकरण 2009 से जंग खा रहे है। 2013-14 में 4.09 करोड़ रुपये का ग्रीन उपकर वसूला तो गया, लेकिन शहरी परिवहन कोष की स्थापना नहीं की गई।
विज्ञापन
खनन में कैग ने पाया कि प्रपत्रों की प्राप्ति, निर्गम और उपयोग का कोई निगरानी तंत्र ही नहीं था। इसमें सरकार ने 6.38 करोड़ रुपये का राजस्व कम वसूला। 14 मामलों में करीब चार करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क वसूला ही नहीं गया।
विज्ञापन
केंद्र सरकार के फ्लेगशिप प्रोग्राम निर्मल भारत अभियान पर भी कैग की रिपोर्ट ने सवाल उठाए हैं। जिलों में ग्राम पंचायतों को बीपीएल परिवारों के लिए व्यक्तिगत शौचालय निर्माण की उपलब्धियों में 50 प्रतिशत तक की कमी पाई गई। पंचायतों को 20 करोड़ रुपये जारी किए, लेकिन रिसीविंग नहीं ली।
निर्मल ग्रामों की स्थिति को बनाए रखने के लिए कोई प्रयास नहीं होने से कई गांवों का स्टेट्स छिन गया। सीएम विवेकाधीन कोष से अपात्र व्यक्तियों और संस्थाओं को करीब 2.53 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। 13 में से छह जिलों में जेल अक्रियाशील हैं। कैदियों को लाने-ले जाने में ही तीन साल में 88 लाख रुपये खर्च किए गए। 78.43 प्रतिशत कैदी सिर्फ तीन जेलों में रखे गए हैं।
कैग ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की लेखा परीक्षा में भी गंभीर सवाल उठाए हैं। राजकीय चिकित्सालय महाविद्यालय हल्द्वानी में आउटसोर्सिंग पर 58.62 लाख रुपए अनियमित रूप से खर्च किए गए। 60.52 लाख के मेडिकल उपकरण आठ साल तक बेकार पड़े रहे।
सेवा प्रदाताओं को 4.54 करोड़ का अनुचित लाभ दिया गया। पेयजल विभाग ने कनेक्शन काटने से बचकर 16 लाख रुपये का सरकार को नुकसान पहुंचाया। जल प्रभार न वसूलने के कारण 1.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। लोक निर्माण विभाग और रेशम विभाग पर भी कैग ने सवाल उठाये हैं।
कैग ने समाज कल्याण और शिक्षा विभाग की अनियमितताओं को भी देखा। नंदा देवी कन्या धन योजना मे 46.80 लाख रुपए का अतिरक्ति व्यय किया गया। इसमें 18.25 लाख का अनियमित भुगतान सामने आया। तराई बीज विकास निगम में कैग ने पाया कि कंपनी ने 0.73 करोड़ रुपये का अतिरिक्त डीलर कमीशन का भुगतान किया।