कैग रिपोर्ट 2019: बजट की व्यवस्था पर भी सवाल, विधायिका से बिना पूछे ही खर्चे 20 हजार करोड़ रुपये
- साल दर साल रही यह व्यवस्था, पिछले 17 सालों से विधानसभा को भी नहीं बता रहे
- कैग ने जताई गंभीर आपत्ति, बजट से बाहर एक रुपया भी खर्च करने की अनुमति नहीं
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विस्तार
विधानसभा से पारित बजट के बाहर एक रुपये को खर्च की अनुमति न होने पर भी प्रदेश में विभागों ने 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर दिए। हैरान करने वाली बात ये है कि यह एक साल का मामला नहीं बल्कि साल दर साल की व्यवस्था रही है। उस पर इस राशि को नियमित करने की भी कोशिश नहीं की गई। कैग ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई है।
विधानसभा में मंगलवार को प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कैग ने प्रदेश की बजट व्यवस्था की भी समीक्षा की। इसमें कई स्तर पर अनदेखी सामने आई लेकिन बजट से अधिक खर्च करने के मामले भी सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक 2005 से लेकर 2017 तक हर साल बजट से अधिक व्यय के मामले सामने आते रहे।
इन मामलों में चाहिए था कि अधिक व्यय को विधानसभा में सदन के समक्ष रखा जाता और लोक लेखा समिति यह तय करती की बजट से अधिक खर्च के मामले में क्या किया जाए। रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि अनुपूरक और मूल बजट सहित कुल बजट में स्वीकृत राशि के अलावा एक रुपये को भी खर्च नहीं किया जा सकता है।
क्या कहता है बजट मैनुअल
अध्याय 13 के प्रस्तर 121 में व्यवस्था है कि किसी एक वित्तीय वर्ष में कुल बजट से अधिक का व्यय सामने आता है तो मांगों को विधायिका के सामने प्रस्तुत कर लोक लेखा समिति की संस्तुति के आधार पर नियमित किया जाना चाहिए।
कैग की टिप्पणी
यह विधायी मंशा के विपरीत है। यह सरकारी खजाने पर विधायी नियंत्रण को भी कम करता है। इसलिए आधिक्य व्यय के सभी प्रकरणों को शीघ्र नियमित करने की जरूरत है और बजट से आधिक्य होने पर नियंत्रण अधिकारी के विरुद्ध सख्त विभागीय कार्यवाही की जानी चाहिए। यह व्यय आधिक्य नियमित नहीं किया गया।
मार्च में खर्च करने से नहीं आ रहे बाज
देहरादून। रिपोर्ट यह भी बताती है कि तमाम शासनादेशों के बावजूद बजट को मार्च माह में खर्च करने की आदत को सुधारा नहीं जा रहा है। 2017-18 के दौरान 33 मामलों में कुल खर्च का 25 प्रतिशत से अधिक का खर्च मार्च 2018 में किया गया। कुल व्यय का 50 प्रतिशत व्यय अंतिम तिमाही में किया गया।
ये है पूरा ब्योरा
2005-06 7 663.50
2006-07 6 935.92
2007-08 6 733.92
2008-09 6 1146.41
2009-10 7 1007.49
2010-11 9 1295.40
2011-12 5 1611.40
2012-13 7 1835.34
2013-14 3 1837.15
2014-15 4 1922.80
2015-16 4 2334.24
2016-17 4 5457.33
कुल व्यय - 20780.90
अनियमितता करने वाले नहीं बचेंगे - सीएम
प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों की लापरवाही से सरकार को 31 मार्च 2018 तक 2,271 करोड़ रुपये की चपत लगी है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के इस खुलासे पर मुख्यमंत्री का सख्त रुख दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिपोर्ट का परीक्षण कर अनियमितता करने के दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश सरकार ने मंगलवार को सदन के पटल पर कैग की यह रिपोर्ट रखी। रिपोर्ट में प्रदेश की जनता से जुड़ी योजनाओं से जुड़े ऊर्जा, खाद्य एवं आपूर्ति, समाज कल्याण, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं वन सरीखे विभागों की गंभीर कारस्तानियां उजागर हुई हैं।
दिल्ली से लौटकर मुख्यमंत्री ने सचिवालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि कैग रिपोर्ट तकनीकी आधार पर होती है। इसका गंभीरता से परीक्षण करवाने के साथ वे भी रिपोर्ट का अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश से बाहर थे, इसलिए रिपोर्ट नहीं देख पाए। परीक्षण में अगर यह सामने आते है कि गड़बड़ी हुई है या किसी ने जानबूझकर गड़बड़ी की है तो उसे बक्शा नहीं जाएगा।
‘हरिद्वार में गंगा की स्वच्छता है प्राथमिकता’
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि गंगा की निर्मलता को लेकर कानपुर में नेशनल गंगा काउंसिल की होने वाली बैठक में हरिद्वार में नदी की स्वच्छता पर वार्ता होगी। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश तक गंगा का जल पीने योग्य है। हरिद्वार में केवल नहाने योग्य है। इसका कारण अभी भी कुछ गंदे नाले गंगा में गिर रहे हैं। यूपी की भूमि पर बसी अवैध बस्तियों की पूरी गंदगी गंगा में बह रही है। इसका समाधान तलाशने के लिए उत्तर प्रदेश से वार्ता होगी।