ब्रेक फेल होने से बारात की बस टकराई, 28 घायल
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उत्तराखंड के पौड़ी जिले के गगवाड़स्यूं घाटी क्षेत्र में शनिवार को चालक की सूझबूझ से बड़ा हादसा होने से टल गया। तमलाग गांव से कल्जीखाल ब्लाक के बनेख मैड़ा गांव जा रही बारात की बस के ब्रेक फेल होने पर बेकाबू हुई बस को चालक ने चट्टान से टकराते हुए खाई में जाने से बचा लिया। बस के चट्टान से टकराने से 28 यात्री घायल हो गए। इनमें एक महिला को गंभीर चोट आई है।
राजस्व पुलिस के अनुसार बस शनिवार सुबह गगवाड़स्यूं पट्टी के तमलाग गांव से एक बारात को लेकर कल्जीखाल ब्लाक के बनेख मैड़ा गांव जा रही थी। बस में 32 बाराती सवार थे।
करीब 11 बजे कांसखेत के आगे गुरेतखाल के तीव्र ढलान पर पहुंचते ही बस के ब्रेक फेल हो गए। हादसे में बस अनियंत्रित हो गई। विपरीत परिस्थितियों में बस चालक स्यूंसी गांव निवासी दिनेश सिंह ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बेकाबू हो चुकी बस को सड़क को दाहिनी तरफ चट्टान से टकरा दिया। चट्टान से टकराने पर बेकाबू हुई बस रुक गई।
इससे बड़ी दुर्घटना होने से टल गई लेकिन 28 लोग घायल हो गए। सभी को 108 सेवा की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घंडियाल ले जाया गया।
चालक ने किसी को नहीं होने दी खबर
घायलों में तमलाग निवासी विनोद नैथानी (35) पुत्र नत्थी राम नैथानी, विकास (35) पुत्र विनोद कुमार, कमल किशोर (28) पुत्र करण सिंह, सावित्री देवी (60) पत्नी कुंदन सिंह, रणजीत सिंह (68) पुत्र गोपाल सिंह, परमेश्वरी देवी (62) पत्नी रणजीत सिंह, अनिल नेगी (43) पुत्र रणजीत सिंह और अशोक को घंडियाल से पौड़ी जिला अस्पताल लाया गया है।
शेष को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार सावित्री देवी के सिर में चोट आने से उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। परमेश्वरी देवी का हाथ फ्रेक्चर हुआ है। सावित्री को छोड़कर अन्य घायलों को छुट्टी दे दी गई है। नायब तहसीलदार आशीष घिल्डियाल ने बताया कि चालक की सूझबूझ से बड़ी घटना होने से बच गई।
तीव्र ढलान पर गाड़ी का ब्रेक फेल हो गया। चालक ने बिना किसी को बताए बेकाबू गाड़ी को चट्टान से टकरा दिया जिससे सभी लोग सकुशल बच गए।
-बस में सवार पंकज नेगी, देहरादून
बस चालक ने सूझबूझ से बड़ी अनहोनी होने से बचा ली। गाड़ी में सवार लोगों को ब्रेक फेल होने का पता लग जाता तो अफरातफरी मच जाती।
-घायल रणजीत सिंह नेगी, निवासी तमलाग
दुर्घटना होते समय कुछ पता नहीं चल पाया। आंखें बंद हो गई थीं। बस चट्टान से नहीं टकराती तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
-घायल परमेश्वरी देवी, निवासी तमलाग