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बजट सत्र में सामने आएगी सरकार की मंशा, नए एक्ट पर हायतौबा

Wed, 17 Feb 2016 03:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला देहरादून Updated Wed, 17 Feb 2016 03:25 PM IST
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budget session show up to intention of the government.

नौ मार्च से प्रस्तावित बजट सत्र में सरकार की मंशा भी साफ होगी। कांग्रेस सरकार को एक  नहीं, बल्कि तीन-तीन ऐसे विधेयकों से भी जूझना हैं, जिनको लेकर राज्य गठन के बाद से केवल बातें ही होती आई हैं। इनमें राज्य आंदोलनकारियों के लिए आरक्षण, पंचायत एक्ट और चकबंदी विधेयक को पास कराना सरकार के लिए किसी चुनौत से कम नहीं होगा।

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राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकारी नौकरी में दस प्रतिशत आरक्षण का विधेयक सरकार ने गैरसैंण सत्र में पारित किया था। इस विधेयक को राजभवन से मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में राज्य आंदोलनकारी इस विधेयक को दोबारा लाने की मांग कर रहे हैं। राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप के मुताबिक इस विधेयक को दोबारा लाया जाए तो राजभवन से मंजूरी की बाध्यता नहीं रहेगी।
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जाहिर है कि वर्तमान राजनीतिक हालात को देखते हुए यह कदम सरकार के लिए आसान नहीं होगा। दूसरी ओर, राज्य आंदोलनकारियों का धीरज भी जवाब दे रहा है। ग्राम पंचायत के पैसों को जिला और क्षेत्र पंचायत को दिए जाने के मामले में ग्राम प्रधान एक बार पहले ही सरकार के खिलाफ मैदान में उतर चुक हैं।
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अब इस सत्र में प्रदेश का पंचायत एक्ट भी सरकार पारित कराने का दावा कर रही है। वर्तमान में लागू पंचायत एक्ट में नए एक्ट के तहत किए गए बदलाव पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में नए एक्ट को लेकर भी हायतौबा मच सकती है। 2003 से ही प्रदेश के अपने पंचायत एक्ट को लागू करने की बात की जा रही है। इसी तरह, चकबंदी विधेयक पर भी सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति का परीक्षण होगा।


चकबंदी विधेयक को इस सत्र में लाने का इरादा मुख्यमंत्री जता चुके हैं। ड्राफ्ट एक्ट भी तैयार कर लिया गया है। इसके बावजूद अभी तक यह साफ नहीं है कि नए चकबंदी अधिनियम को किस रूप में लिया जाएगा। चकबंदी को भूमि सुधार के  लिए जरूरी माना जा रहा है। इसके बावजूद अभी तक यह मामला पक्ष-विपक्ष के बीच नोक-झोंक का सबब बनता रहा है।

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