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बसपा को भुगतना पड़ेगा बिखराव का खामियाजा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 25 Mar 2014 11:20 AM IST
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लोकसभा 2014 में बिखराव के दौर बसपा का निकल पाना भी मुश्किल होता जा रहा है। बसपा विधायक दल दो धड़ों में बंट ही चुका है।
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कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश बसपा से निलंबित
बसपा के लिए विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक वोट हासिल करने वाले कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश भी बसपा से निलंबित है। ऐसे में लोकसभा चुनाव में पार्टी को इस बिखराव का खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उत्तराखंड में कांग्रेस और भाजपा के लिए बसपा की चुनौती कई स्थानों पर रही है। बसपा ने 2004 के लोकसभा चुनाव में 6.77 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। पर 2009 मत प्रतिशत के लिहाज से बसपा के लिए उर्वर साबित हुआ था।
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बसपा को इस चुनाव में 15.29 प्रतिशत वोट मिले थे। बसपा का यह प्रदर्शन कांग्रेस और भाजपा के बाद प्रदेश में अन्य दलों से बेहतर था। बसपा ने पांच संसदीय सीटों में से चार पर बेहतर प्रदर्शन किया था।
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टिहरी में 2009 में मिले थे 12.73 प्रतिशत वोट
खासकर तब जब बसपा को हरिद्वार और उधमसिंहनगर तक ही सीमित माना जा रहा है। पर 2009 में बसपा का टिहरी में भी प्रदर्शन बेहतर रहा। इस दल ने टिहरी में 2009 में 12.73 प्रतिशत वोट हासिल किए थे।
इसी तरह हरिद्वार में बसपा को 23 और नैनीताल में 19 प्रतिशत वोट मिले थे। पर इस बार का चुनाव बसपा के लिए भी टेड़ी खीर साबित होने जा रहा है।
बसपा में हुआ बिखराव फिलहाल दूर होने का नाम लेता नहीं दिख रहा है। ठीक चुनाव से पहले ही दो फाड़ होने से पार्टी का चुनाव भी प्रभावित होना तय है।