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11 साल पहले बिछड़े भाई को वापस खींच लाया राखी का बंधन

Sun, 30 Aug 2015 02:47 AM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 30 Aug 2015 02:47 AM IST
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brother came back to home after 11 years.

इसे राखी के पवित्र और मजबूत बंधन की ताकत ही कहेंगे जो 11 साल पूर्व बिछड़े भाई को बहन के पास खींच लाया। रक्षाबंधन पर भाई को देख इकलौती बहन की खुशी का ठिकाना न रहा।

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बहन ने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा तो भाई ने भी भविष्य में बहन को खुश रखने का वचन दिया। लौटने के बाद आनंद ने माता-पिता से माफी मांगी और दोबारा गलती न दोहराने की बात कही।
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पेशे से राजमिस्त्री करमपुर बडुवा छोई खास निवासी आनंद पुत्र मदन राम 23 अप्रैल 2004 को अचानक घर से बगैर बताए कहीं चला गया था। उसकी काफी तलाश की गई, लेकिन कहीं पता नहीं चला। जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिवार का दर्द भी कम होता गया।

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बहन को तो मानो रक्षाबंधन पर हर खुशी म‌िल गई

brother came back to home after 11 years.

छह माह पहले हापुड़ जिले के औरंगाबाद के गोहरा गांव का राहुल नौकरी के लिए दिल्ली गया था, जो आनंद के साथ ही सुरक्षागार्ड की ड्यूटी करने लगा। इस दौरान आनंद ने राहुल दोस्त बनाया और अपना दर्द भी बताया।

राहुल ने उसे घर जाने के लिए समझाया। इसके बाद रक्षाबंधन से एक दिन पहले राहुल आनंद को लेकर दिल्ली से रामनगर पहुंचा। आनंद ने कहा कि उसे घर जाने की हिम्मत नहीं है।

तब राहुल रामनगर से छोई आनंद के घर गया और उसके बड़े भाई रमेश को लेकर रामनगर पहुंचा। 11 साल बाद भाई को देखकर रमेश भावुक हो गए और भाई से गले लगकर रोने लगे। इकलौती शादीशुदा बहन पद्मा को तो जैसे रक्षाबंधन के दिन सारी खुशियां मिल गईं।

कलाई पर राखी बांधी तो आंखों से बहने लगी धार

brother came back to home after 11 years.

बहन ने खुशी के मारे भीगी आंखों से भाई की आरती कर उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा तो भाई की आंखों से भी झरझर आंसू बहने लगे। सूचना पर दोनों चचेरी बहनें भी घर आ गईं।

जिसको भी घटना की जानकारी लगी, वह मदन राम के घर की ओर दौड़ पड़ा। आनंद ने बताया कि 2004 में वह अपने दोस्त पंकज निवासी राजपुरा हल्द्वानी (जो अपने ननिहाल छोई में आकर पढ़ाई करता था) के साथ घर से भागकर दिल्ली चला गया।

जहां उसने होटलों में काम किया और सुरक्षागार्ड की नौकरी भी की, पर अक्सर घर की याद सताती रहती थी। इन वर्षों में बीच में वह दो बार रामनगर आया भी, परंतु घर जाने की हिम्मत नहीं हुई।

घर वालों के ल‌िए दोस्त बना भगवान

brother came back to home after 11 years.

11 साल बाद आनंद को घर लाने वाले उसके दोस्त राहुल अरोरा को परिजन किसी भगवान से कम नहीं मानते। आनंद की मां लीला देवी, पिता मदन राम, चाचा नंद राम, बहन पद्मा, चचेरी बहन संगीता, सोनी और बड़े भाई रमेश का मानना है कि हमारे लिए तो राहुल भगवान का रूप है, क्योंकि उसने आनंद को समझा बुझाकर घर तक पहुंचाया। कहा क‌ि अगर राहुल न होता तो पता नहीं हमारा आनंद कभी घर आता भी या नहीं।

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