Dehradun: छह साल में 1590 करोड़ से अधिक रकम खर्च ही नहीं कर पाए निकाय, खुद कमाई करने में सबसे फिसड्डी
वर्ष 2015 से लेकर 2021 तक निकायों को केंद्र व राज्य से 5537 करोड़ 91 लाख रुपये का बजट मिला। इसमें से निकाय केवल 3947 करोड़ 98 लाख रुपये (71.29 प्रतिशत) ही खर्च कर पाए। ऑडिट रिपोर्ट में यह माना गया है कि इसकी मुख्य वजह अधिकारियों की सुस्ती है।
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खुद कमाई करने में सबसे फिसड्डी प्रदेश के नगर निकाय छह साल में जो पैसा केंद्र व राज्य से मिला, उसे भी पूरा खर्च नहीं कर पाए। इसके लिए निकायों के अधिकारियों, कर्मचारियों की सुस्ती को जिम्मेदार माना गया है। शहरी निकायों की ऑडिट रिपोर्ट में इस लापरवाही का खुलासा हुआ है।
इसके मुताबिक, वर्ष 2015 से लेकर 2021 तक निकायों को केंद्र व राज्य से 5537 करोड़ 91 लाख रुपये का बजट मिला। इसमें से निकाय केवल 3947 करोड़ 98 लाख रुपये (71.29 प्रतिशत) ही खर्च कर पाए। ऑडिट रिपोर्ट में यह माना गया है कि इसकी मुख्य वजह अधिकारियों की सुस्ती है। निर्माणाधीन परियोजनाओं में देरी के चलते लाभार्थियों को किस्तों का भुगतान किया जाना था, लेकिन नहीं हो पाया।
निकायों की आमद केवल 19.77 प्रतिशत ही थी
रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया है कि निकायों की आमद केवल 19.77 प्रतिशत ही थी। महालेखाकार ने सिफारिश की है कि निकायों की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। शहरी स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने और संपत्ति कर संग्रहण में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने, राजस्व बढ़ोतरी के लिए अधिक कराधान शक्तियां प्रदान करने का प्रावधान किया जाए।
शौचालयों का पैसा दबाकर बैठ गए निकाय
स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों का निर्माण उन परिवारों में किया जाना था, जिनके पास शौचालय नहीं है। इसके लिए सरकार ने पहले से कोई सर्वे नहीं कराया। नगर निगम देहरादून व हल्द्वानी के लिए दो-दो हजार शौचालय का लक्ष्य रखा गया, जिसके सापेक्ष नगर निगम देहरादून में 1128 और हल्द्वानी में 1153 शौचालय ही मिल पाए।
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इनके लिए जो रकम जारी हुई थी, वह निगम दबाकर बैठ गए। शहरी विकास निदेशक ने कहा कि निकायों से यह पैसा वापस लेने का आदेश जारी किया जाएगा। ऑडिट रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया है कि निकायों में बिना सर्वे ही शौचालय निर्माण का लक्ष्य तय किया गया।