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देहरादून में महंगा हो गया खून
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 13 Apr 2017 11:02 AM IST
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- फोटो : BBC
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देहरादून में अब जरूरतमंदों को खून के लिए अधिक पैसे खर्च करने होंगे। राजधानी के तीन प्राइवेट ब्लड बैंक ने खून के दाम में बढ़ोत्तरी की है। आईएमए ब्लड बैंक में प्रति यूनिट 750 रुपये, हिमालयन अस्पताल में 400 और श्री महंत इंदिरेश अस्पताल ब्लड बैंक में 150 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है। वहीं, ब्लड बैंक प्रबंधन खून की अतिरिक्त जांचों को कीमत में बढ़ोत्तरी का कारण बता रहे हैं।
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दून का एकमात्र सरकारी ब्लड बैंक राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल में है। यहां से सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को महज 250 रुपये और प्राइवेट अस्पताल में भर्ती मरीज को 650 रुपये यूनिट खून मिलता है। वहीं प्राइवेट ब्लड बैंक इसके दो से तीन गुना ज्यादा दाम वसूलते हैं।
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आईएमए ब्लड बैंक में जरूरतमंदों को अब एक यूनिट खून के लिए 1200 के बजाय 1950 रुपये देने होंगे। वहीं हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट ब्लड बैंक में 1100 से बढ़कर 1500 रुपये यूनिट और श्री महंत इंदिरेश ब्लड बैंक में 1200 के बजाय 1350 रुपये यूनिट चुकाने पड़ेंगे। आईएमए ब्लड बैंक के डा. संजय उप्रेती ने बताया कि ब्लड बैंक में खून की नेट टेस्टिंग शुरू की गई है। इससे खून ज्यादा सुरक्षित रहता है। जिससे संक्रमण का पता कम समय में लग जाता है। यही कारण है कि कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है।
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दान के खून पर कितना लूटोगे श्रीमान
देहरादून के तीन प्राइवेट ब्लड बैंक, खास तौर पर आईएमए ब्लड बैंक द्वारा सुरक्षा के नाम पर खून की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी पर सवाल उठने लगे हैं। जरूरतमंदों ने कहा कि ऐसी सुरक्षा का क्या फायदा, जिससे गरीब खून खरीद ही ना पाए। खून के दाम बढ़ने से आम आदमी का परेशान होना तय है। इस निर्णय के बाद मरीजों और उनके तीमारदारों की जेब पर बोझ बढ़ गया है।
खून में बढ़ोत्तरी की जानकारी अमर उजाला को अजबपुर निवासी दिलीप कुमार ने बुधवार को दी। उन्होंने बताया कि उनकी दोनों किडनियां खराब हैं। वह छह साल से डायलिसिस पर हैं। इसके चलते उन्हें लगातार खून की जरूरत पड़ती है। दिलीप ने बताया कि खून के दाम बढ़ने से उन्हें परेशानी हो रही है। उन्हें चिंता इस बात की है कि खून के लिए इतना पैसा कहां से लाएंगे ? दिलीप जैसे सैकड़ों मरीज ब्लड बैंकों के रेट बढ़ाने की वजह से अब परेशानियां झेलेंगे।
ऐसे ही एक पीड़ित रामकुमार ने एक कहानी सुनाई कि गरीबों के एक गांव में हेल्थ कैंप लगा। एक गरीब बुजुर्ग को बीमारी की दवाई देते हुए डॉक्टर ने ताकीद किया कि दोपहर में खाना और रात में खाना खाने के बाद दो-दो गोलियां लेना। कई दिनों के भूख से परेशान उस बुजुर्ग ने डॉक्टर के सामने ही सारी दवाई एक साथ खा ली। मरते-मरते वह बोला, डॉक्टर साहब खाने के लिए भोजन होता तो इस दवा की जरूरत ही नहीं पड़ती। सुरक्षा जांचों के नाम पर खून की कीमत बढ़ाने से अब खून के जरूरतमंदों का बुजुर्ग जैसा ही हाल होगा।
एक जानकार सवाल उठाते हैं कि आखिर दान के खून पर ये ब्लड बैंक वाले कितना लूटेंगे। दून के सरकारी अस्पताल का खून भी तो मरीजों को चढ़ता ही है। उसकी कीमत तो महज 650 रुपये है। दून में सभी ब्लड बैंक समय-समय पर शिविर आयोजित कर लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं। लोगों से नियमित तौर पर स्वैच्छिक रक्तदान की अपील करते हैं, लेकिन जरूरतमंदों को इस खून के बदले ब्लड बैंक को भारी ‘कीमत’ चुकानी पड़ती है।
ब्लड बैंकों का दावा है कि वह लिए गए खून की जांच करते हैं, जिससे कि वह किसी को नुकसान न करे। उन जांचों के शुल्क के रूप में ही कीमत ली जाती है। अब तक सभी प्राइवेट ब्लड बैंकों में खून की कीमत लगभग बराबर थी, लेकिन बढ़ोतरी के बाद इनमें काफी ज्यादा अंतर आ गया है। आईएमए के ब्लड बैंक में खून के दाम में एकाएक इतनी ज्यादा बढ़ोतरी की गई है कि यह आम गरीब मरीज की पहुंच से बाहर हो गया है। विशेषकर ऐसे मरीजों और तीमारदारों का दर्द बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिन्हें नियमित तौर पर खून की जरूरत पड़ती है। मरीज उस खून से तभी सुरक्षित रह सकेगा, जब वह उसे खरीदने की स्थिति में होगा, लेकिन कीमतों में इतनी ज्यादा वृद्धि के बाद जेब पर बोझ बढ़ना स्वाभाविक है।
यह होती हैं जांचें
किसी भी रक्तदाता से खून लेने के बाद ब्लड बैंक में उसकी एचआईवी, हेपेटाइटिस बी व सी, मलेरिया, सिफलिस और ब्लड ग्रुप की जांच होती है। इन जांचों के जरिए खून में इन बीमारियों से संबंधित किसी भी तरह के संक्रमण का पता लगाया जा सकता है।
कितना है जांच का खर्च
एचआईवी, हेपेटाइटिस बी व सी की जांच रैपिड कार्ड मैथड, एलाइजा टेस्ट और केनिलुमिनेंस और नेट के जरिए की जा सकती है। प्राइवेट में रैपिड कार्ड से 12 रुपये, एलाइजा से 750, केनिलुमिनेंस से 850 और नेट से 2200 रुपये शुल्क लिया जाता है। हेपेटाइटिस बी व सी की जांच भी लगभग इतनी होती है। मलेरिया और सिफलिस की जांच कार्ड मैथड से होती है। मलेरिया की जांच 30 से 50 रुपये और सिफलिस 30 से 40 रुपये में होता है।
जल्दी पता चल सकेगा संक्रमण
ब्लड बैंक के अनुसार नेट जांच से संक्रमण का जल्दी पता चल सकता है। सामान्य तौर पर एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति नेट में 4-5 दिन, केनिलुमिनेंस में 14 से 16 दिन, एलाइजा में 21-28 दिन और रैपिड में लगभग तीन माह बाद संक्रमण का पता चलता है।
हम जरूरतमंद व्यक्ति को पूरी तरह सुरक्षित खून उपलब्ध कराने के लिए नेट टेस्ट करवा रहे हैं। इसमें खर्च ज्यादा आता है। यही कारण है कि कीमत में वृद्धि हुई है।
- डा. संजय उप्रेती, आईएमए ब्लड बैंक
श्री महंत इंदिरेश अस्पताल प्रबंधन ने ब्लड बैंक की दरों में मामूली वृद्धि की है। ब्लड बैंक में कुछ नए टेस्ट शुरू किए गए हैं और कुछ नए टेस्ट शुरू किए जाने की योजना है। इसी कारण यह मामूली शुल्क वृद्धि की गई है।
- भूपेंद्र रतूड़ी, मुख्य जनंसपर्क अधिकारी, एसएमआईएच